छिंदवाड़ा, जीशान अंसारी। निजी नर्सिंग कॉलेजों की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। शहर के एसएके मेमोरियल इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग कॉलेज की करीब 60 जीएनएम छात्राओं ने कॉलेज संचालक पर गंभीर धोखाधड़ी के आरोप लगाए हैं। छात्राओं का कहना है कि वर्ष 2022-23 में उन्हें जीएनएम नर्सिंग कोर्स में प्रवेश दिलाया गया, लेकिन चार वर्ष बीत जाने के बाद भी न तो उनका विश्वविद्यालय में नियमित इनरोलमेंट कराया गया, न परीक्षा आयोजित हुई और न ही उन्हें मान्यता प्राप्त शिक्षा मिल सकी। इससे उनका भविष्य अधर में लटक गया है।
सोमवार को आक्रोशित छात्राओं ने कॉलेज संचालक के परिवार द्वारा संचालित निजी अस्पताल के सामने धरना-प्रदर्शन किया। हाथों में तख्तियां लेकर छात्राओं ने न्याय की मांग करते हुए आरोप लगाया कि कॉलेज प्रबंधन ने प्रवेश के समय सुनहरे भविष्य के सपने दिखाए, लेकिन चार वर्षों तक केवल आश्वासन और बहाने मिलते रहे। प्रदर्शन के बाद छात्राएं कोतवाली थाना पहुंचीं और लिखित शिकायत देकर संचालक के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज करने की मांग की।
छात्राओं के अनुसार प्रवेश के समय प्रत्येक छात्रा से 40 से 60 हजार रुपये तक फीस ली गई। इसके अलावा टीसी, माइग्रेशन सहित अन्य मूल दस्तावेज भी कॉलेज प्रबंधन ने अपने पास जमा करा लिए। अब जब छात्राएं फीस और दस्तावेज वापस मांग रही हैं तो उन्हें टालमटोल किया जा रहा है। उनका आरोप है कि कॉलेज के पास प्रवेश के समय आवश्यक मान्यता भी नहीं थी, इसके बावजूद प्रवेश लेकर फीस वसूली गई। यदि यह आरोप सही साबित होता है तो यह शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
पीड़ित छात्राओं का कहना है कि वे दूसरे जिलों से छिंदवाड़ा आकर हॉस्टल में रहीं, परिवारों ने कर्ज लेकर पढ़ाई का खर्च उठाया, लेकिन चार वर्षों में एक भी नियमित परीक्षा नहीं हुई। कई छात्राओं का आरोप है कि जब उन्होंने कॉलेज संचालक से जवाब मांगा तो उन्हें कहा गया कि "जहां शिकायत करनी है कर दो, हम सब संभाल लेंगे।" छात्राओं ने यह भी आरोप लगाया कि कॉलेज प्रबंधन अब भी 50 दिनों में परीक्षा कराने का भरोसा देकर मामले को टालने का प्रयास कर रहा है, जबकि पिछले चार वर्षों से इसी तरह के आश्वासन दिए जाते रहे हैं।
छात्राओं ने जिला प्रशासन और पुलिस से न केवल धोखाधड़ी का मामला दर्ज करने, बल्कि जमा फीस वापस दिलाने, आर्थिक और मानसिक नुकसान का मुआवजा देने तथा कॉलेज की मान्यता और प्रवेश प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका यह भी आरोप है कि विवादों के बावजूद कॉलेज संचालक ने तामिया में भी इसी नाम से नया नर्सिंग संस्थान शुरू किया है, जिसकी भी जांच होनी चाहिए ताकि अन्य छात्राएं कथित रूप से ऐसी स्थिति का शिकार न हों।
इस मामले में कॉलेज संचालक रिजवान खान से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका। उनके भाई, जो अस्पताल का संचालन करते हैं, उन्होंने अस्वस्थता का हवाला देकर मीडिया से बातचीत नहीं की। मामले में छात्राओं द्वारा लगाए गए आरोपों की पुष्टि प्रशासनिक जांच के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल पुलिस ने शिकायत प्राप्त कर मामले की जांच शुरू कर दी है।




