नई दिल्ली। नीति आयोग ने अपनी स्टेट सपोर्ट मिशन (एसएसएम) पहल के तहत 28 सितंबर 2026 को "विकसित पंचायत: लोगों, स्थानों, संसाधनों और अवसरों को जोड़ना" विषय पर एक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया। यह कार्यक्रम असम सरकार के गोलाप बोरबोरा स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास (जीबीएसआईपीआरडी) के सहयोग से आयोजित किया गया। एक आधिकारिक बयान में मंगलवार को कहा गया कि इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य ग्राम पंचायतों को ऐसी संस्थाओं के रूप में सशक्त बनाना था जो समावेशी विकास, बेहतर जनसेवा और सतत ग्रामीण विकास को आगे बढ़ा सकें।
उद्घाटन सत्र में विकसित ग्राम पंचायतों के निर्माण के लिए विकेंद्रीकृत शासन, क्षमता निर्माण, डिजिटलाइजेशन और विभिन्न योजनाओं के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
कार्यशाला में स्थानीय विकास की पारंपरिक क्षेत्र-आधारित सोच से आगे बढ़कर स्थानिक एवं एकीकृत योजना अपनाने की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा हुई।
इस दौरान जीआईएस, जियोस्पेशियल डेटा, ग्राम मास्टर प्लान और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के उपयोग पर विशेष जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि इन तकनीकों की मदद से स्थानीय संसाधनों, बुनियादी ढांचे की कमी, भूमि उपयोग और विकास की संभावनाओं की अधिक सटीक पहचान की जा सकती है।
साथ ही, ग्राम पंचायत विकास योजना (जीपीडीपी), ई-ग्रामस्वराज और पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स (पीएआई) के साथ स्थानिक सूचनाओं को जोड़ने पर बल दिया गया, ताकि साक्ष्य-आधारित और बेहतर समन्वित विकास योजनाएं तैयार की जा सकें।
प्रतिभागियों ने पंचायती राज संस्थाओं के संवैधानिक आधार और 73वें संविधान संशोधन से जुड़े प्रावधानों पर भी चर्चा की। बैठक में पंचायतों को अधिक प्रभावी बनाने के लिए स्पष्ट कार्य विभाजन, पर्याप्त वित्तीय संसाधन, उचित मानव संसाधन और निर्णय लेने की अधिक शक्तियां देने की जरूरत बताई गई।
इसके अलावा, ग्राम सभाओं की भूमिका बढ़ाने और संस्थागत जवाबदेही को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।
कार्यशाला में क्षमता निर्माण और संस्थागत मजबूती को पंचायतों के प्रभावी संचालन के लिए महत्वपूर्ण बताया गया। प्रतिभागियों ने कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधियों और पंचायत कर्मियों को डेटा विश्लेषण, संसाधन जुटाने, निवेश प्राथमिकता तय करने, योजनाओं के समन्वय और परिणामों की निगरानी जैसे विषयों पर प्रशिक्षित किया जाना चाहिए।
साथ ही डिजिटल और हाइब्रिड शिक्षण मॉडल, तकनीकी सहायता और क्षमता विकास कार्यक्रमों को बढ़ावा देने की आवश्यकता भी रेखांकित की गई।
नीति आयोग के सदस्य डॉ. आर. बालासुब्रमण्यम ने कहा कि पंचायत स्तर की योजना को केवल अलग-अलग क्षेत्रों तक सीमित रखने के बजाय स्थानिक योजना के दृष्टिकोण से देखने की जरूरत है। उन्होंने मानव पूंजी, सामाजिक पूंजी और स्थानीय आर्थिक क्लस्टरों के विकास पर अधिक ध्यान देने की वकालत की।
उनका मानना था कि पंचायत स्तर पर संसाधनों और अवसरों की बेहतर पहचान से ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिल सकती है।
कार्यशाला में पंचायतों को मजबूत बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं की पहचान की गई, जिनमें पंचायतों को अधिक स्पष्ट कार्य आवंटन, वित्तीय संसाधनों में वृद्धि, स्वयं के राजस्व स्रोत विकसित करने, तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने और जिला योजना समितियों को अधिक सक्रिय बनाने पर जोर दिया गया।
इसके साथ ही विभिन्न सरकारी विभागों और योजनाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा ग्रामीण और शहरी विकास योजनाओं को जिला स्तर पर एकीकृत करने की आवश्यकता भी बताई गई।












