गांधीनगर। गुजरात में आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी भगवान बिरसा मुंडा की 151वीं जयंती के उपलक्ष्य में 12 से 18 नवंबर तक एक सप्ताह तक चलने वाले समारोह के दौरान, 32,000 से अधिक आदिवासी लाभार्थियों को लगभग 1,500 करोड़ रुपए की विकास सहायता मिलेगी।राज्य-स्तरीय मुख्य कार्यक्रम 15 नवंबर को छोटा उदेपुर में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की उपस्थिति में आयोजित किया जाएगा। इस आयोजन के तहत, 17,000 से अधिक आदिवासी किसानों को 'वन अधिकार अधिनियम, 2006' के अंतर्गत लाभ प्रदान किए जाएंगे।
इस कार्यक्रम को गुरुवार को गांधीनगर में मुख्यमंत्री पटेल की अध्यक्षता में हुई एक उच्च-स्तरीय बैठक में अंतिम रूप दिया गया।
इस बैठक में आदिवासी विकास मंत्री नरेश पटेल, पूर्व मंत्री और वरिष्ठ आदिवासी नेता गणपत वसावा, मुख्य सचिव एम.के. दास और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
यह आयोजन 14 आदिवासी जिलों के 55 विधानसभा क्षेत्रों के साथ-साथ 20 गैर-आदिवासी जिलों और 17 नगर निगमों में किया जाएगा।
उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी वलसाड में आयोजित कार्यक्रमों में भाग लेंगे, जबकि राज्य भाजपा अध्यक्ष जगदीश विश्वकर्मा 15 नवंबर को दाहोद में कार्यक्रम का नेतृत्व करेंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2021 में 15 नवंबर को 'जनजातीय गौरव दिवस' के रूप में मनाने की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य भारत के स्वतंत्रता संग्राम में बिरसा मुंडा के योगदान और आदिवासी समुदायों के लिए उनके महत्व को सम्मान देना है।
आदिवासी विकास विभाग इसका मुख्य आयोजक होगा, जबकि अन्य सरकारी विभाग सह-आयोजक के रूप में इसमें शामिल होंगे।
कार्यक्रमों की शुरुआत 13 नवंबर को 14 आदिवासी जिलों के 55 विधानसभा क्षेत्रों में 'युवा संवाद सम्मेलनों' के साथ होगी।
14 नवंबर को बिरसा मुंडा और अन्य आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों की प्रतिमाओं के पास स्वच्छता अभियान चलाए जाएंगे और पूजा-अर्चना की जाएगी। इसके अलावा, आदिवासी समुदायों के संतों और आध्यात्मिक नेताओं को सम्मानित करने के लिए भी कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
14 नवंबर की शाम को, आदिवासी तालुकों की ग्राम पंचायतों में हर घर में 'दीपोत्सव' मनाया जाएगा। साथ ही, प्रार्थना, आरती, भजन और पारंपरिक आदिवासी नृत्यों वाले सार्वजनिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।
इन कार्यक्रमों में बिरसा मुंडा की जीवन गाथा गुजराती, भीली और स्थानीय आदिवासी बोलियों में सुनाई जाएगी। साथ ही, इन कार्यक्रमों का सोशल मीडिया पर सीधा प्रसारण (लाइव स्ट्रीमिंग) भी किया जाएगा। इन समारोहों के दौरान, आदिवासी परिवारों को आवास सहायता की पहली किस्त, दुधारू पशु, पौधे और स्वरोजगार के लिए अन्य सहायता प्रदान की जाएगी।
आजीविका के अवसरों को बढ़ाने के उद्देश्य से, 14 आदिवासी जिलों के साप्ताहिक बाजारों में 'अटल बूथ' बनाए जाएंगे, जहां ग्रामीण कारीगरों और स्वयं-सहायता समूहों द्वारा बनाए गए उत्पादों का प्रदर्शन और बिक्री की जाएगी।
16 नवंबर को आदिवासी समुदायों के प्रतिष्ठित सदस्यों, जिनमें डॉक्टर, वकील, चार्टर्ड अकाउंटेंट, उद्यमी और समुदाय के अन्य प्रमुख नेता शामिल हैं, का एक सम्मेलन आयोजित किया जाएगा।
17 नवंबर की शाम को 55 विधानसभा क्षेत्रों में पारंपरिक ग्रामीण खेल उत्सव आयोजित किए जाएंगे। इनमें गिल्ली-डंडा, तीरंदाजी, रस्साकशी, बोरी दौड़, तीन-पैर वाली दौड़, लट्टू घुमाने की प्रतियोगिता, कबड्डी और खो-खो जैसे खेल शामिल होंगे।
18 नवंबर को सभी 14 आदिवासी जिलों में महिला सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। इन समारोहों का उद्देश्य आदिवासी समुदायों के इतिहास, सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक कौशल, कला और भारत के स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान को उजागर करना है।
पटेल ने तैयारियों की समीक्षा की और संबंधित विभागों के सचिवों को निर्देश दिया कि वे कार्यक्रमों के सुचारू संचालन के लिए आपसी समन्वय सुनिश्चित करें।
बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव संजीव कुमार, अतिरिक्त प्रधान सचिव विक्रांत पांडे, आदिवासी विकास सचिव आलोक कुमार पांडे, सचिव अजय कुमार और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।













