इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के हीरानगर थाना क्षेत्र से ऑनर किलिंग (Honour Killing) का एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ एक 25 वर्षीय युवती के प्रेम संबंध से नाराज उसकी सगी मां और भाई ने मिलकर पहले उसके साथ बेरहमी से मारपीट की और फिर उसे जहर देकर मार डाला। वारदात को आत्महत्या का रूप देने के लिए आरोपियों ने खुद ही उसे अस्पताल पहुंचाया और तीन महीने तक पुलिस को गुमराह करते रहे। हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और घर के डिलीट किए गए सीसीटीवी (CCTV) फुटेज की जांच के बाद पुलिस ने इस जघन्य हत्याकांड का पर्दाफाश कर मां-भाई दोनों को गिरफ्तार कर लिया है।


दूसरी जाति के युवक से प्रेम संबंध बना हत्या की वजह

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, बजरंग नगर निवासी 25 वर्षीय ज्योति अग्रवाल, हींग कारोबारी दौलतराम अग्रवाल की बेटी थी। ज्योति ऑनलाइन बिजनेस से जुड़ी हुई थी और इसी दौरान उसकी जान-पहचान दूसरी जाति के एक युवक से हुई, जो धीरे-धीरे प्रेम संबंध में बदल गई। परिवार इस रिश्ते के सख्त खिलाफ था, जिसके चलते घर में आए दिन विवाद और तनाव की स्थिति बनी रहती थी।


प्रेमी से मिलने जाने पर भाई ने दीवार पर दे मारा सिर

पुलिस जांच और कॉल डिटेल्स के अनुसार, यह खूनी खेल बीती 2 अप्रैल को खेला गया। 2 अप्रैल को ज्योति अपने प्रेमी से मिलने के लिए घर से बाहर निकल रही थी, तभी मां और भाई ने उसे रोक लिया। बात इतनी बढ़ी कि भाई प्रकाश अग्रवाल ने आपा खो दिया और ज्योति के साथ बेरहमी से मारपीट शुरू कर दी। आरोप है कि प्रकाश ने ज्योति का सिर जोर से दीवार पर दे मारा, जिससे उसके कान के पीछे गहरी और आंतरिक चोट आई। इस मारपीट में मां शीतल अग्रवाल ने भी अपने बेटे का साथ दिया। बाद में आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतका के शरीर पर 12 से 13 गंभीर चोटों के निशान पाए गए हैं।


साक्ष्य छुपाने के लिए दिया जहर, अस्पताल में रची झूठी कहानी

मारपीट में जब ज्योति गंभीर रूप से घायल हो गई, तो कानूनी कार्रवाई और समाज के डर से आरोपियों ने पूरे मामले को दबाने की साजिश रची। उन्होंने ज्योति को जबरन जहरीला पदार्थ खिला दिया और खुद ही उसे लेकर अस्पताल पहुंचे। वहां डॉक्टरों और पुलिस के सामने आरोपियों ने रोते हुए यह झूठी कहानी बनाई कि ज्योति ने घर में हुए मामूली विवाद के बाद गुस्से में आकर खुद ही जहर खा लिया है। इलाज के दौरान अस्पताल में ज्योति की मौत हो गई, जिसके बाद पुलिस ने शुरुआती तौर पर मर्ग कायम कर जांच शुरू की थी।


डिलीटेड डीवीआर (DVR) और पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोला राज

इस अंधे कत्ल की गुत्थी को सुलझाने में फॉरेंसिक साइंस और तकनीकी जांच की बड़ी भूमिका रही:


  • चोटों के निशान: पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जब डॉक्टरों ने ज्योति के शरीर पर करीब एक दर्जन से अधिक चोटों के निशान और सिर की अंदरूनी चोट की पुष्टि की, तो पुलिस का शक परिवार पर गहरा गया, क्योंकि यह आत्महत्या के मामले से मेल नहीं खा रहा था।
  • CCTV फुटेज से छेड़छाड़: पुलिस की टीम जब दोबारा मौका-ए-वारदात (मकान) का मुआयना करने पहुंची, तो देखा कि घर के हर हिस्से में कैमरे लगे थे। लेकिन संदिग्ध रूप से घटना के आसपास के 2 से 3 दिनों का पूरा डीवीआर (DVR) डेटा डिलीट कर दिया गया था।


तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से जब साक्ष्य जुटाए गए और पुलिस ने भाई प्रकाश अग्रवाल से कड़ाई से पूछताछ की, तो उसने टूटकर अपना जुर्म कबूल कर लिया।


मां को जेल और भाई को पुलिस रिमांड पर लिया गया

एसीपी (ACP) रूबीना मिजबानी ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि आरोपियों ने तीन महीने तक इस हत्याकांड को पूरी तरह छुपा कर रखा था। साक्ष्यों के आधार पर हत्या की धारा दर्ज कर पुलिस ने मुख्य आरोपी भाई प्रकाश अग्रवाल को गिरफ्तार कर कोर्ट से पुलिस रिमांड पर लिया है ताकि वारदात में इस्तेमाल अन्य चीजों को बरामद किया जा सके। वहीं, सह-आरोपी मां शीतल अग्रवाल को न्यायालय में पेश करने के बाद सीधे जेल भेज दिया गया है। पुलिस इस मामले में अन्य करीबियों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है।