नई दिल्ली। भारत की कुल प्राथमिक ऊर्जा आपूर्ति (टोटल प्राइमरी एनर्जी सप्लाई-टीपीईएस) वर्ष 2024-25 में बढ़कर 39,055 पेटाजूल हो गई है, जबकि 2023-24 में यह 37,936 पेटाजूल थी। यह जानकारी केंद्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की ओर से लोकसभा में दी गई।सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) राव इंद्रजीत सिंह ने कहा कि मार्च 2025 तक देश की कुल नवीकरणीय ऊर्जा (रिन्यूएबल एनर्जी) क्षमता बढ़कर 47,04,043 मेगावाट आंकी गई है, जो एक साल पहले यानी 31 मार्च 2024 तक 21,09,655 मेगावाट थी।
उन्होंने बताया कि एक पेटाजूल ऊर्जा 1,0¹⁵ जूल (एक हजार लाख करोड़ जूल) या लगभग 278 गीगावाट-घंटे के बराबर होती है।
मंत्री ने कहा कि सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) ने आधिकारिक आंकड़ों के समय पर संग्रह और प्रकाशन के लिए मजबूत व्यवस्था विकसित की है। नेशनल सैंपल सर्वे (एनएसएस) के तहत प्राथमिक आंकड़े अब कंप्यूटर असिस्टेड पर्सनल इंटरव्यू (सीएपीआई) और ई-सिग्मा जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए जुटाए जाते हैं। इन प्लेटफॉर्म में इन-बिल्ट वैलिडेशन, रियल-टाइम डेटा मॉनिटरिंग, एआई-आधारित चैटबॉट और बहुभाषी इंटरफेस जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग से डेटा संग्रह के दौरान सटीकता बढ़ी है और सर्वेक्षण के आंकड़ों का रियल-टाइम में सत्यापन संभव हुआ है। इसके अलावा वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से नियमित निरीक्षण और फील्ड स्टाफ को लगातार प्रशिक्षण भी दिया जाता है, जिससे आंकड़ों की गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है।
राव इंद्रजीत सिंह ने बताया कि इन सुधारों के कारण सर्वेक्षण रिपोर्ट जारी करने में लगने वाला समय पहले के 8-9 महीनों से घटकर 45 से 90 दिन रह गया है। अब वार्षिक सर्वेक्षण रिपोर्ट 90-120 दिनों में, तिमाही रिपोर्ट 45-60 दिनों में और मासिक रिपोर्ट 15-30 दिनों के भीतर जारी की जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए मंत्रालय के नए माइक्रोडाटा पोर्टल पर सर्वेक्षणों का गोपनीय यूनिट-लेवल डेटा भी उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे शोधकर्ता, नीति निर्माता और अन्य हितधारक आधिकारिक आंकड़ों का विश्लेषण कर साक्ष्य-आधारित नीतियां तैयार कर सकते हैं।
मंत्री ने यह भी बताया कि अर्थव्यवस्था में हुए बदलावों को बेहतर ढंग से दर्शाने और अंतरराष्ट्रीय सांख्यिकीय मानकों के अनुरूप बनाने के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी), औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) के बेस ईयर में भी संशोधन किया गया है। इसके तहत जीडीपी और आईआईपी का बेस ईयर 2011-12 से बदलकर 2022-23 किया गया है, जबकि सीपीआई का बेस ईयर 2012=100 से बदलकर 2024=100 कर दिया गया है।




