दमोह। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर मध्य प्रदेश भर में आयोजित दीपोत्सव अभियान के तहत दमोह जिले में भी नगर पालिका और स्थानीय प्रशासन द्वारा 6 लाख दीपक प्रज्ज्वलित किए गए। हालांकि, इस भव्य आयोजन के बाद सामने आई जमीनी तस्वीरों, यातायात व्यवस्था के ठप होने और सरकारी धन के व्यय को लेकर स्थानीय स्तर पर तीखा विवाद और आक्रोश उत्पन्न हो गया है।


दीपोत्सव के बाद सामने आई गरीबी की दुखद तस्वीर

आयोजन समाप्त होने और देर रात दीये बुझने के बाद शहर में एक भावुक और विचारणीय दृश्य देखने को मिला: दीये बुझते ही कई गरीब परिवार, महिलाएं और मासूम बच्चे सड़कों पर पहुंचे और दीयों में बचा हुआ बूंद-बूंद तेल अपने बर्तनों और डिब्बों में इकट्ठा करते नजर आए। तेल एकत्र कर रही एक मासूम बच्ची ने कहा कि प्रधानमंत्री जी का धन्यवाद, कम से कम आज उनके जन्मदिन के कारण उसे और उसके परिवार को सब्जी बनाने के लिए मुफ्त में तेल नसीब हो गया। यह दृश्य सोशल मीडिया और क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।


अस्पताल का रास्ता बंद होने से एंबुलेंस फंसी; आमजन परेशान

प्रशासन द्वारा दीपोत्सव के लिए शहर के बीचों-बीच स्थित मुख्य मार्ग और जिला अस्पताल के एक तरफ के मार्ग को पूरी तरह खाली कराकर ब्लॉक कर दिया गया था: मुख्य मार्ग बंद होने के कारण अस्पताल की ओर जाने वाली कई एंबुलेंस और गंभीर मरीज घंटों जाम में फंसे रहे। स्थिति को संभालने के लिए पुलिस को एंबुलेंसों को रॉन्ग साइड (गलत दिशा) से निकालना पड़ा, जिससे हादसों का खतरा बना रहा।


ब्राह्मण समाज ने उठाए सवाल; सनातन संस्कृति का दिया हवाला

दमोह ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष मनोज देवलिया ने इस आयोजन और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर बेहद कड़ा रुख अपनाया: मनोज देवलिया ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सनातन परंपरा और शास्त्रों के अनुसार किसी जीवित व्यक्ति के जन्मदिन पर इस तरह दीपोत्सव मनाना पूरी तरह से अनुचित और अमंगलकारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि आम जनता का रास्ता रोककर यातायात ठप करना और जन्मदिन के नाम पर सरकारी खजाने से लाखों रुपये बहाना पूरी तरह गलत और जनविरोधी है।


नगर पालिका CMO के गोलमोल जवाब; कर्मचारियों से जलते दीये रखवाने पर सवाल

आयोजन में हुए खर्चे को लेकर जब दमोह नगर पालिका के मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) राजेंद्र लोधी से मीडिया ने सवाल पूछे, तो प्रशासनिक लापरवाही उजागर हुई: सीएमओ राजेंद्र लोधी ने स्वीकार किया कि 6 लाख दीयों, बत्तियों और तेल का संपूर्ण खर्च नगर पालिका दमोह के बजट से वहन किया गया है। सरकारी कर्मचारियों द्वारा सुरक्षा नियमों को दरकिनार कर जलते हुए दीये हाथों में लेकर बिछाने और रखने के सवाल पर सीएमओ कोई स्पष्ट उत्तर नहीं दे सके और गोलमोल जवाब देते नजर आए।