रोम। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टिप्पणियों से वाशिंगटन और रोम के बीच कूटनीतिक तनाव पैदा हो गया है। इस सबके बीच इटली के उपप्रधानमंत्री और बुनियादी ढांचा मंत्री मातियो साल्विनी ने शनिवार को प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी का बचाव किया और सरकार के प्रति एकजुटता दोहराई। मिलान में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान साल्विनी ने कहा, “मैं सिर्फ इतना दोहरा सकता हूं कि जो प्रधानमंत्री पर हमला करता है, वह पूरी सरकार और पूरे इटली पर हमला करता है। हालांकि इससे दोनों मित्र देशों और उनकी जनता के बीच संबंध प्रभावित नहीं होंगे।”

यह विवाद तब शुरू हुआ जब ट्रंप ने आरोप लगाया कि मेलोनी ने जी-7 शिखर सम्मेलन में उनके साथ तस्वीर खिंचवाने के लिए “मिन्नतें की थीं” और वह होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े मुद्दे पर "अनुपस्थित" रहीं।

ट्रंप ने कहा था, “वह मेरी समर्थक थीं, लेकिन अब मैं उन्हें पसंद नहीं करता।”

इस पर मेलोनी ने सोशल मीडिया पर जवाब देते हुए तस्वीर से जुड़े दावों को “पूरी तरह मनगढ़ंत” बताया और सहयोगी देशों के प्रति अमेरिकी राष्ट्रपति के रवैये पर आश्चर्य जताया।

विवाद बढ़ने के बाद इटली के राष्ट्रपति सर्जियो मैटारेला ने मेलोनी के प्रति एकजुटता व्यक्त की। वहीं, विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी ने अपनी अमेरिका यात्रा रद्द कर दी।

ताजानी ने एक्स पर लिखा, “राष्ट्रपति ट्रंप के प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के प्रति गंभीर और अपमानजनक शब्द पूरे इटली का अपमान हैं। इसी कारण मैंने 21 और 22 जून को प्रस्तावित अपनी अमेरिका यात्रा रद्द करने का फैसला किया है।”

रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप ने इटली के टीवी कार्यक्रम 'एल'आरिया चे तिरा' को दिए एक टेलीफोनिक इंटरव्यू में कहा, “जॉर्जिया मेलोनी ने मेरे साथ फोटो खिंचवाने की भीख मांगी थी। वह मेरे साथ तस्वीर चाहती थीं। मैं शायद ऐसा नहीं करता, लेकिन मुझे उन पर तरस आ गया।”

इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने संवाददाता से पूछा, “आपकी प्रधानमंत्री कैसी हैं?”

जब उनसे एवियन शिखर सम्मेलन के दौरान मेलोनी के साथ हुई बातचीत पर टिप्पणी मांगी गई तो उन्होंने जवाब दिया, “शायद वह खुश हैं कि मैंने उनसे बात की। मुझ पर उनसे बात करने की कोई बाध्यता नहीं थी।”

ट्रंप ने आगे कहा कि यूरोप ने ऊर्जा और आव्रजन दोनों मुद्दों पर गंभीर गलतियां की हैं।

उन्होंने कहा, “यूरोपियों ने ऊर्जा नीति पर सब कुछ गलत किया और आव्रजन पर भी सब कुछ गलत किया। अगर वे इन समस्याओं का समाधान नहीं करते हैं, तो यूरोप कभी पहले जैसा नहीं रहेगा।”