भोपाल | विशेष संवाददाता देश में सर्वाधिक आदिवासी आबादी वाले राज्य मध्य प्रदेश में आदिवासियों को मिले संवैधानिक भूमि अधिकारों के धड़ल्ले से हो रहे उल्लंघन का मामला अब पूरी तरह गर्मा गया है। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी (MPCC) के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर आदिवासियों के आर्थिक और सामाजिक शोषण के गंभीर आरोप मढ़े हैं। भोपाल में आयोजित एक पत्रकार वार्ता (प्रेस कॉन्फ्रेंस) के दौरान पीसीसी चीफ ने आरोप लगाया कि पिछले आठ वर्षों में सरकारी संरक्षण के चलते सूबे के भाजपा नेताओं, प्रभावशाली लोगों और उनके चहेते उद्योगपतियों ने आदिवासियों की कई लाख एकड़ पुश्तैनी जमीन को अवैध रूप से कौड़ियों के दाम खरीदा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कांग्रेस ने महामहिम राष्ट्रपति से इस पूरे भूमि हस्तांतरण खेल की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराने के लिए हस्तक्षेप की मांग की है।


नियमों को ठेंगे पर रखकर सक्षम अधिकारियों ने दी अनुमति, 1.26 लाख हेक्टेयर जमीन बिकी

जीतू पटवारी ने संवैधानिक प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि मध्य प्रदेश में डेढ़ करोड़ से अधिक आदिवासी निवास करते हैं। कानूनन आदिवासियों की भूमि का किसी भी गैर-आवासी व्यक्ति को हस्तांतरण सक्षम अधिकारी (जैसे जिला कलेक्टर) की विशेष अनुमति और ठोस तार्किक कारणों के बिना कतई नहीं हो सकता।


आंकड़ों के साथ बोला हमला: कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि इस कड़े नियम के बावजूद पिछले आठ वर्षों में मध्य प्रदेश के भीतर आदिवासियों की लगभग 3 लाख एकड़ (करीब 1.26 लाख हेक्टेयर) बहुमूल्य भूमि का सौदा कर दिया गया। इस खेल में कई जिलों के कलेक्टर भी आरोपों के घेरे में हैं, जिन्होंने नियमों को ताक पर रखकर रसूखदारों को जमीनें खरीदने की अनुमतियां बांटीं।


खनन और कॉर्पोरेट के नाम पर बेदखली, पलायन को मजबूर हुए वनवासी

जीतू पटवारी ने विकास और औद्योगिकीकरण की नीतियों पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि बड़ी कंपनियों और खनन परियोजनाओं (माइनिंग प्रोजेक्ट्स) के नाम पर आदिवासियों को उनकी जल-जंगल-जमीन से क्रूरतापूर्वक बेदखल किया गया है।


उन्होंने आदिवासियों की मौजूदा स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए निम्नलिखित बिंदु सामने रखे:

  • पुश्तैनी पहचान पर संकट: कॉरपोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने के लिए आदिवासियों की पीढ़ियों पुरानी जमीनों का डायवर्जन किया गया, जिससे उनकी आजीविका छिन गई।
  • मजबूरन पलायन: जमीन हाथ से चले जाने के कारण अपनी ही धरती पर आदिवासी अल्पसंख्यक और भूमिहीन हो गए हैं, जिससे वे दूसरे राज्यों में बंधुआ मजदूरी और पलायन करने के लिए मजबूर हैं।


कमलनाथ भी छिंदवाड़ा में उठा चुके हैं आदिवासियों की जमीन का मुद्दा

उल्लेखनीय है कि आदिवासियों की जमीन की अवैध खरीद-फरोख्त का यह विवाद नया नहीं है। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ भी आदिवासी बहुल छिंदवाड़ा जिले में बड़े पैमाने पर भू-माफियाओं और गैर-आदिवासियों द्वारा जमीनों को हड़पने के आरोप लगातार लगाते रहे हैं। छिंदवाड़ा सहित महाकौशल और विंध्य अंचल के कई आदिवासी बाहुल्य जिलों में जमीनों के इस हेरफेर को लेकर स्थानीय स्तर पर लगातार हिंसक और कानूनी विवाद सामने आ रहे हैं।


भाजपा सरकार पर '₹500 करोड़ के तबादला उद्योग' का भी मढ़ा आरोप

प्रेस वार्ता के दौरान जीतू पटवारी ने केवल भूमि घोटालों पर ही बात नहीं की, बल्कि उन्होंने वर्तमान भाजपा सरकार पर प्रशासनिक मोर्चे पर भी तीखा प्रहार किया।

  • तबादला उद्योग: उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में फिलहाल 500 करोड़ रुपए का 'तबादला उद्योग' (ट्रांसफर रैकेट) सक्रिय है, जहां पैसों के दम पर मनचाही पोस्टिंग दी जा रही है।
  • दिग्विजय सिंह का वीडियो: पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह से जुड़े हालिया वायरल वीडियो पर सफाई देते हुए पटवारी ने कहा कि वह वीडियो पूरी तरह भ्रामक, कूटरचित (एडिटेड) और भाजपा की डर्टी पॉलिटिक्स का एक हिस्सा है, जिसे कांग्रेस को बदनाम करने के लिए सोशल मीडिया पर फैलाया गया।


"हमारी सरकार आई तो रद्द होंगे सौदे, आदिवासियों को मिलेगा हक"

विपक्ष के तौर पर अपना रुख साफ करते हुए जीतू पटवारी ने घोषणा की कि भविष्य में प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनते ही इन पिछले आठ वर्षों में हुए सभी संदिग्ध और बड़े भूमि सौदों की बारीकी से निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। जहां कहीं भी नियमों का उल्लंघन, जालसाजी या अवैध भूमि हस्तांतरण पाया जाएगा, वहां न केवल दोषी अधिकारियों और भू-माफियाओं के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई होगी, बल्कि उन अवैध सौदों को निरस्त कर आदिवासियों की जमीनें उन्हें ससम्मान वापस लौटाई जाएंगी।