मुंबई। शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की टिप्पणी की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि खड़गे को अपने बयान के लिए माफी मांगनी चाहिए। इसके अलावा, निरुपम ने महाराष्ट्र में सूखे से प्रभावित किसानों के लिए राज्य सरकार की ओर से घोषित सहायता पैकेज को राहत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। वहीं, कांग्रेस के 'वोट चोरी' के आरोपों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि बैलेट पेपर से हुए विधान परिषद चुनावों में भी कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत पाई।संजय निरुपम ने कहा कि महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने भी खड़गे की टिप्पणी की आलोचना की है। खड़गे ने पटना में एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके दिवंगत पिता को लेकर अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया था। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विवाद में प्रधानमंत्री के पिता को शामिल करना उचित नहीं है और कांग्रेस अध्यक्ष का बयान उनके पद की गरिमा के अनुरूप नहीं था।
निरुपम ने कहा कि खड़गे की टिप्पणी के बाद भाजपा और शिवसेना की ओर से उनसे माफी मांगने की मांग की गई है। उन्होंने पृथ्वीराज चव्हाण के बयान का हवाला देते हुए कहा कि महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री ने भी माना है कि खड़गे को इस तरह की भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए था। चव्हाण वरिष्ठ और अनुभवी नेता हैं। उनके द्वारा खड़गे की आलोचना किया जाना कांग्रेस अध्यक्ष के बयान पर गंभीर सवाल खड़े करता है। खड़गे की भाषा पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए निरुपम ने कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री मोदी और उनके पिता के लिए इस्तेमाल किए गए अपशब्दों पर माफी मांगनी चाहिए। सार्वजनिक जीवन में रहने वाले नेताओं को अपनी भाषा और पद की गरिमा का ध्यान रखना चाहिए।
महाराष्ट्र में सूखे से प्रभावित किसानों के लिए राज्य सरकार की ओर से घोषित सहायता राशि पर संजय निरुपम ने कहा कि प्रदेश के कई जिलों में गंभीर सूखे के कारण किसानों की फसलें बर्बाद हुई हैं। महाराष्ट्र के 36 जिलों में से लगभग 20 से 25 जिलों में अकाल जैसी स्थिति पैदा हुई थी, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सरकार के अन्य प्रतिनिधियों ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। उनकी पार्टी के कई जनप्रतिनिधियों और मंत्रियों ने भी खेतों में जाकर किसानों से मुलाकात की और नुकसान का आकलन किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की एक टीम भी महाराष्ट्र पहुंची थी, जिसने किसानों से बातचीत करने के बाद स्थिति का जायजा लिया।
शिवसेना प्रवक्ता ने कहा कि राज्य सरकार ने आश्वासन दिया था कि आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद किसानों को सहायता दी जाएगी, ताकि उनकी दिवाली अंधेरे में न गुजरे। इसी घोषणा को लागू करते हुए महाराष्ट्र कैबिनेट ने 7,500 करोड़ रुपए के सहायता पैकेज की घोषणा की है। इसके तहत प्रत्येक किसान को कम से कम 5,000 रुपए की सहायता देने की योजना है, जिससे वे त्योहार मना सकें और तत्काल जरूरतें पूरी कर सकें।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सहायता अंतिम नहीं है। निरुपम ने कहा कि आने वाले दिनों में सरकार किसानों की खेती से जुड़ी दूसरी जरूरतों पर भी विचार करेगी। इसमें बैंक ऋण, बीज, खाद और बिजली बिलों में राहत जैसे मुद्दे शामिल हैं। सरकार का उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक आपदा से उबरने में मदद देना और उन्हें दोबारा खेती के लिए तैयार करना है।
कांग्रेस के 'वोट चोरी' वाले आरोपों पर सवाल उठाते हुए संजय निरुपम ने विधान परिषद के चुनाव परिणामों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विधान परिषद की 28 सीटों के लिए चुनाव हुए, लेकिन कांग्रेस किसी भी सीट पर जीत हासिल नहीं कर पाई। इन चुनावों में बैलेट पेपर का इस्तेमाल हुआ था और ईवीएम का प्रयोग नहीं किया गया था। इन चुनावों में मतदाता स्नातक और शिक्षक वर्ग से जुड़े थे। कांग्रेस को इस परिणाम पर विचार करना चाहिए कि वह इन वर्गों के बीच भी अपेक्षित समर्थन हासिल नहीं कर सकी। उन्होंने यह भी कहा कि केवल सत्ता में होने के आधार पर जीत सुनिश्चित नहीं होती। निरुपम ने कर्नाटक का उल्लेख करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा और कहा कि वहां भी पार्टी जीत दर्ज नहीं कर पाई।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपनी हार के लिए कभी ईवीएम, कभी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर और कभी चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराती है। पार्टी को अपनी राजनीतिक रणनीति और चुनावी अभियान की समीक्षा करनी चाहिए, न कि संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाकर अपनी हार का कारण बताना चाहिए। निरुपम ने चेतावनी दी कि यदि कांग्रेस इसी तरह चुनावी नतीजों के लिए संस्थाओं को जिम्मेदार ठहराती रही और अपने अभियान में बदलाव नहीं किया, तो 2029 तक उसके पास बचे कुछ राज्यों में भी जनता उससे सत्ता छीन सकती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को 'वोट चोरी' के आरोपों पर पुनर्विचार करना चाहिए और चुनावी परिणामों से सबक लेना चाहिए।













