भोपाल। राजधानी भोपाल के जहांगीराबाद थाने में अधिवक्ता राकेश रावल के साथ पुलिसकर्मियों द्वारा की गई कथित बर्बर मारपीट के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस गंभीर घटनाक्रम में डीसीपी जोन-1 ने त्वरित कार्रवाई करते हुए जहांगीराबाद थाना प्रभारी (टीआई) राजन सिंह अहिरवार, कॉन्स्टेबल यश लखेरा एवं आरक्षक रामस्वरूप को तत्काल प्रभाव से निलंबित (सस्पेंड) कर दिया है। निलंबन अवधि के दौरान तीनों को रिजर्व सेंटर से संबद्ध किया गया है, साथ ही पूरे प्रकरण की निष्पक्ष प्राथमिक जांच सात दिन के भीतर पूरी कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के कड़े निर्देश जारी किए गए हैं।


अधिवक्ता राकेश रावल की बेरहमी से पिटाई के विरोध में करीब 50 वकीलों ने मंगलवार देर रात 3 बजे तक जहांगीराबाद थाने का घेराव कर जमकर हंगामा काटा। इस दौरान एडवोकेट राजेश व्यास के नेतृत्व में पहुंचे वकीलों ने पुलिस प्रशासन को खुली चेतावनी देते हुए बेहद तीखे तेवर दिखाए। हंगामे के दौरान एडवोकेट राजेश व्यास ने पुलिस को सीधी धमकी देते हुए कहा कि जैसे नक्सलाइट इलाकों में थानों में आग लगती है, हम नहीं चाहते कि राजधानी भोपाल में भी थानों में आग लगना शुरू हो जाए।


इस तीखे बयान के बाद थाना परिसर में माहौल और अधिक गरमा गया। थाने के भीतर वकीलों ने शक्ति प्रदर्शन करते हुए "राजेश व्यास मतलब आतंक का दूसरा नाम" जैसे भड़काऊ नारे भी लगवाए। वकीलों के इस आक्रामक रुख और देर रात तक चले धरने से पुलिस महकमे के हाथ-पांव फूल गए।


पूरे विवाद की शुरुआत मंगलवार शाम करीब 8 बजे हुई। पीड़ित अधिवक्ता राकेश रावल ने आरोप लगाया कि वे खटलापुरा मंदिर की तरफ से अपने वाहन से लौट रहे थे, तभी जहांगीराबाद पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोक लिया और थाने चलने का दबाव बनाया। जब उन्होंने वाहन में पेट्रोल खत्म होने की बात कही, तो पुलिसकर्मी भद्दी-भद्दी गालियां देने लगे। अधिवक्ता द्वारा विरोध जताने पर पुलिसकर्मियों ने उन्हें जबरन कीचड़ में पटक दिया और लाठियों से बेरहमी से पीटा। घटना के बाद वकीलों ने एक वीडियो जारी किया, जिसमें अधिवक्ता राकेश रावल के पैरों पर लाठियों के गहरे चोटों के निशान और कीचड़ से सने कपड़े साफ नजर आ रहे हैं। वीडियो सामने आते ही वकीलों का गुस्सा भड़क उठा और वे लामबंद होकर थाने पहुंच गए।


जहांगीराबाद थाना परिसर में धरने पर बैठे आक्रोशित अधिवक्ताओं ने थाना प्रभारी (टीआई) राजन अहिरवार और मारपीट में शामिल दोषी पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड करने तथा उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग उठाई। वकीलों का साफ कहना था कि जब खाकी वर्दी खुलेआम गुंडागर्दी पर उतर आए और कानून के रखवाले ही अधिवक्ताओं पर लाठियां भांजने लगें, तो इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वकीलों ने चेतावनी दी कि जब तक टीआई और संबंधित पुलिसकर्मियों पर सख्त एक्शन नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा।


देर रात तक चले इस जबर्दस्त हंगामे और तनावपूर्ण स्थिति के बीच पुलिस के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे और वकीलों को शांत कराने का प्रयास किया। मामले में एडिशनल पुलिस कमिश्नर एडिशनल सीपी शैलेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि पूरे घटनाक्रम की बारीकी से जानकारी जुटाई जा रही है और तथ्यों की निष्पक्ष जांच कराई जा रही है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर यथोचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, थाने में घुसकर दी गई खुली धमकियों और वकीलों पर पुलिस की बर्बरता के इस दोहरे घटनाक्रम ने राजधानी में कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।