छतरपुर, विनोद मिश्रा। जिले के राजनगर जनपद शिक्षा केंद्र में ब्लॉक एकेडमिक समन्वयक के पद पर पदस्थ शिक्षक राकेश द्विवेदी के रहस्यमयी ढंग से लापता होने के हाई-प्रोफाइल मामले का पटाक्षेप हो गया है। घर पर अपना मोबाइल और अधिकारियों पर गंभीर आरोपों से भरा पत्र छोड़कर लापता हुए शिक्षक बुधवार को सकुशल अपने घर लौट आए हैं। बताया जा रहा है कि शिक्षक मानसिक तनाव के बीच ओरछा धाम पहुंचे थे, जहां रामराजा सरकार के दर्शन और मुंडन संस्कार कराने के बाद वे सीधे घर पहुंचे। शिक्षक के सकुशल लौटने से परिजनों और पुलिस ने राहत की सांस ली है, लेकिन उनके द्वारा छोड़े गए पत्र में शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों पर प्रताड़ना के आरोपों से महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।


घटनाक्रम के अनुसार, शिक्षक राकेश द्विवेदी बीते दिन परिजनों को बिना कुछ बताए अचानक लापता हो गए थे। घर से निकलने से पूर्व उन्होंने अपना मोबाइल फोन घर पर ही छोड़ दिया था और एक शिकायती पत्र भी छोड़ा था। पत्र में उन्होंने शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और काम के नाम पर मानसिक दबाव बनाने का आरोप लगाया था। शिक्षक के अचानक गायब होने और पत्र की भाषा को देखकर अनहोनी की आशंका के चलते उनके बड़े भाई संतोष कुमार द्विवेदी ने तत्काल सिटी कोतवाली पहुंचकर गुमशुदगी व अपहरण की आशंका की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।


शिक्षक द्वारा छोड़े गए पत्र में जिला परियोजना समन्वयक अरुण शंकर पांडेय, बीआरसी अतुल चतुर्वेदी, अकाउंटेंट राजेश सिंह और सीएम राइज स्कूल के शिक्षक सुमन सिंह के नामों का उल्लेख करते हुए गंभीर आरोप लगाए गए थे। शिक्षक के परिजनों का आरोप है कि उन्हें बीते करीब 6 माह से वेतन नहीं मिला था और नि:शुल्क पाठ्यपुस्तक वितरण को लेकर भी उन पर अनुचित दबाव बनाया जा रहा था। परिजनों के अनुसार, विभागीय खींचतान और वेतन रोके जाने से वे गहरे मानसिक अवसाद से जूझ रहे थे।


विवाद गरमाने के बाद विभागीय अधिकारियों ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। बीआरसी अतुल चतुर्वेदी ने कहा कि शिक्षक को विभागीय कार्यों और दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही बरतने पर नियमानुसार नोटिस दिए गए थे, जो एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है; इसमें कोई व्यक्तिगत दुर्भावना नहीं थी। वहीं DPC अरुण शंकर पांडेय ने स्पष्ट किया कि जिस पद पर कर्मचारी पदस्थ है, उसे उस पद की जिम्मेदारियां निभानी ही होंगी। वेतन विवाद पर उन्होंने कहा कि शासन स्तर पर ऑनलाइन अटेंडेंस व्यवस्था में बदलाव के चलते कुछ तकनीकी देरी हुई थी, लेकिन हाल ही में दो माह का वेतन जारी किया जा चुका है। पाठ्यपुस्तक वितरण के संबंध में उन्होंने स्पष्ट किया कि परिवहन का खर्च शासन वहन करता है, कर्मचारियों को अपनी जेब से राशि नहीं लगानी होती। डीपीसी ने कहा कि वे पुलिस की निष्पक्ष जांच का स्वागत करते हैं और जो भी तथ्य होंगे, वे सामने आएंगे।


सिटी कोतवाली थाना प्रभारी सतीश सिंह ने बताया कि शिक्षक के सकुशल लौटने के बाद उनसे विस्तृत पूछताछ की जा रही है। शिक्षक द्वारा छोड़े गए पत्र, परिजनों की शिकायत और शिक्षा विभाग के संबंधित अधिकारियों को तलब कर सभी के औपचारिक बयान दर्ज किए जाएंगे। पुलिस का कहना है कि पूरे घटनाक्रम के कानूनी व प्रशासनिक पहलुओं की गहराई से जांच कर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।