टीकमगढ़। शहर के व्यस्त नए बस स्टैंड क्षेत्र और डुमराऊ में आबकारी नियमों को दरकिनार कर संचालित की जा रही शराब दुकानों को लेकर स्थानीय निवासियों और नगर पालिका पार्षदों का आक्रोश चरम पर पहुंच गया है। स्वीकृत स्थान के बजाय दूसरे रिहायशी व संवेदनशील इलाकों में दुकानें खोले जाने और आसामाजिक तत्वों के जमावड़े को लेकर पूर्व में ज्ञापन सौंपने के बावजूद कार्रवाई न होने पर नागरिकों ने आबकारी विभाग व पुलिस प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।


नियमों की धज्जियां: स्वीकृत कहीं और, दुकानें चल कहीं और रहीं

स्थानीय नागरिकों और पार्षदों का आरोप है कि आबकारी विभाग की साठगांठ से शराब ठेकेदार मनमाने ढंग से शहरी सीमा में दुकानें चला रहे हैं: नए बस स्टैंड के ठीक सामने संचालित शराब दुकान कागजों में 'पुरानी टेहरी' क्षेत्र के नाम पर स्वीकृत है। नियमानुसार इसे पुरानी टेहरी की निर्धारित भौगोलिक सीमा में होना चाहिए था, लेकिन इसे बस स्टैंड जैसे अत्यधिक व्यस्त और संवेदनशील स्थान पर शिफ्ट कर दिया गया।


डुमराऊ में संचालित शराब दुकान आनंतपुरा (ग्रामीण क्षेत्र) के नाम पर स्वीकृत है, लेकिन आबकारी नियमों का उल्लंघन करते हुए इसका संचालन नगर पालिका की शहरी सीमा के भीतर धड़ल्ले से किया जा रहा है। शहर में स्थिति यह हो गई है कि मात्र 4 किलोमीटर की परिधि में 5 शराब दुकानें संचालित हो रही हैं, जिससे रिहायशी इलाकों का माहौल खराब हो रहा है।


खुले मैदानों में छलक रहे जाम; यात्री, महिलाएं और छात्र परेशान

नए बस स्टैंड पर अवैध रूप से संचालित इस दुकान के कारण प्रतिदिन यात्रा करने वाले यात्रियों, महिलाओं और छात्राओं का निकलना दूभर हो गया है: दुकान के आसपास और पास के खाली मैदानों में दिन-रात शराबियों की महफिल जमी रहती है।खुलेआम शराबखोरी के चलते आए दिन गाली-गलौज, छींटाकशी और मारपीट के मामले सामने आ रहे हैं, जिससे क्षेत्र की शांति व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो रही है।


आबकारी और पुलिस प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल

क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि पूर्व में प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। न तो आबकारी विभाग इन दुकानों के लोकेशन की जांच कर नियम विरुद्ध संचालन पर रोक लगा रहा है और न ही पुलिस प्रशासन गश्त बढ़ाकर असामाजिक तत्वों पर कार्रवाई कर रहा है।


जनप्रतिनिधियों और स्थानीय निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इन दुकानों को इनके स्वीकृत स्थानों पर स्थानांतरित नहीं किया गया और आसामाजिक गतिविधियों पर अंकुश नहीं लगा, तो वे उग्र आंदोलन और चक्काजाम करने को मजबूर होंगे।