वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मध्यावधि चुनाव में कांग्रेस के दोनों सदनों पर कब्जा जमाने के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी को बधाई दी। हालांकि उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी की हार का एक कारण यह बताया कि वह खुद चुनावी बैलेट पर नहीं थे। दूसरी ओर, डेमोक्रेट नेताओं ने लोगों की बढ़ती जीवन-यापन लागत कम करने और ट्रंप प्रशासन की कड़ी जांच करने का वादा किया।
इन चुनाव नतीजों के बाद वॉशिंगटन की राजनीतिक तस्वीर बदल गई है। डेमोक्रेटिक पार्टी जनवरी में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट दोनों का नियंत्रण संभालने की तैयारी कर रही है। वहीं, रिपब्लिकन पार्टी को अब अपने नेतृत्व और चुनावी रणनीति पर सवालों का सामना करना पड़ रहा है।
चुनावी रात को सीबीएस न्यूज से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि मेरा संदेश है कि डेमोक्रेट्स को बधाई। मैं देश के हित में उनके साथ काम करने के लिए तैयार हूं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अगर वह खुद चुनाव लड़ रहे होते, तो रिपब्लिकन पार्टी का प्रदर्शन बेहतर रहता।
ट्रंप ने हार के लिए कुछ हद तक रिपब्लिकन समर्थकों के कम मतदान और कुछ उम्मीदवारों को लेकर मतदाताओं की नाराजगी को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवारों के लिए काफी मेहनत की, लेकिन उसका चुनावी फायदा नहीं मिल पाया।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि राष्ट्रपति के तौर पर उनके पास वीटो की संवैधानिक शक्ति है और डेमोक्रेट्स को कोई कानून पास कराने के लिए व्हाइट हाउस के साथ बातचीत करनी होगी।
सीनेट में डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता चक शूमर ने इस जीत को ऐतिहासिक बताया। बुधवार को वॉशिंगटन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि सभी मुश्किलों के बावजूद हमने सीनेट जीत ली है। राहत अब आने वाली है।
शूमर के अनुसार, बढ़ती महंगाई, स्वास्थ्य सेवाओं का खर्च और सरकार को लेकर लोगों की नाराजगी ने डेमोक्रेट्स की जीत में बड़ी भूमिका निभाई। उन्होंने आरोप लगाया कि रिपब्लिकन पार्टी आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे परिवारों की चिंताओं को समझने के बजाय ट्रंप के राजनीतिक एजेंडे का पालन करती रही।
शूमर ने कहा कि डेमोक्रेट्स ने मतदाताओं की बात सुनी और ऐसे उम्मीदवारों को मैदान में उतारा जो पारंपरिक रूप से रिपब्लिकन माने जाने वाले राज्यों में भी मुकाबला कर सकें। प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेटिक नेता हकीम जेफरीज, जो सदन के पहले अश्वेत स्पीकर बनने की स्थिति में हैं, ने कहा कि उनकी पार्टी लोगों को राहत देने और सरकार को जवाबदेह बनाने के लिए कदम उठाएगी। उन्होंने समर्थकों से कहा, "यह बदलाव का चुनाव है।"
जेफरीज ने आवास, किराना और ईंधन की कीमतें कम करने, स्वास्थ्य सेवाओं की सुरक्षा बहाल करने और प्रशासन से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कराने का वादा किया। उन्होंने संकेत दिया कि डेमोक्रेटिक बहुमत कांग्रेस की शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए सरकार के फैसलों की गहन समीक्षा करेगा।
डेमोक्रेटिक नेशनल कमेटी (डीएनसी) के अध्यक्ष केन मार्टिन ने चुनाव नतीजों को जनता का स्पष्ट संदेश बताया। उन्होंने कहा कि लोग महंगाई, स्वास्थ्य सेवा, आव्रजन और सरकारी जवाबदेही जैसे मुद्दों पर कार्रवाई चाहते हैं। उन्होंने कहा कि डेमोक्रेट्स ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीति और ईरान युद्ध से जुड़े फैसलों को चुनौती देंगे।
उधर, रिपब्लिकन नेताओं ने नतीजों की अलग व्याख्या की।
प्रतिनिधि सभा के स्पीकर माइक जॉनसन ने माना कि उनकी पार्टी ने बहुमत खो दिया है, लेकिन उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि मध्यावधि चुनावों में अक्सर राष्ट्रपति की पार्टी को सीटों का नुकसान होता है। उन्होंने कहा, "ऐसी परिस्थितियों को पार करना बहुत मुश्किल होता है और लगता है कि इस बार भी इतिहास खुद को दोहरा रहा है।"
जॉनसन ने चेतावनी दी कि कांग्रेस की निगरानी शक्तियों का इस्तेमाल राजनीतिक बदले की भावना से नहीं होना चाहिए।
वहीं, सीनेट में रिपब्लिकन नेता जॉन थ्यून ने अपनी पार्टी के रिकॉर्ड का बचाव किया। उन्होंने कर नीतियों, सीमा सुरक्षा, न्यायिक नियुक्तियों और आर्थिक कदमों को रिपब्लिकन पार्टी की उपलब्धियां बताया। इस हार के बाद रिपब्लिकन पार्टी के अंदर नेतृत्व में बदलाव को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।
रिपब्लिकन सांसद राल्फ नॉर्मन ने इस नतीजे को पार्टी के लिए 'चेतावनी की घंटी' बताया। माना जा रहा है कि अगले सप्ताह होने वाले पार्टी नेतृत्व चुनाव में माइक जॉनसन की भूमिका और आगे की रणनीति पर गंभीर चर्चा होगी।
तीन नवंबर को हुए इन चुनावों से पहले रिपब्लिकन पार्टी के पास व्हाइट हाउस और कांग्रेस के दोनों सदनों का नियंत्रण था। लेकिन अब डेमोक्रेट्स की जीत के बाद जनवरी 2027 से अमेरिका में 'विभाजित सरकार' की स्थिति बन जाएगी। इसका मतलब यह होगा कि कांग्रेस की समितियों, जांच प्रक्रियाओं और विधायी कार्यक्रमों पर डेमोक्रेट्स का नियंत्रण रहेगा, जबकि राष्ट्रपति ट्रंप के पास कार्यकारी शक्तियां और वीटो का अधिकार बना रहेगा।













