ग्रेटर नोएडा, रोहित पाठक। ग्रेटर नोएडा स्थित शारदा यूनिवर्सिटी में विद्यार्थियों के समग्र व्यक्तित्व विकास, सकारात्मक दृष्टिकोण और आधुनिक जीवन में मानसिक संतुलन स्थापित करने के उद्देश्य से माइंड सेट, लाइफ सेट प्रेरक कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसके मुख्य वक्ता बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री। इस विशेष संवाद सत्र में विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों में अध्ययनरत देश और विदेश के हजारों छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने युवाओं के साथ करियर, मानवीय रिश्तों, मानसिक तनाव और भविष्य की प्राथमिकताओं को लेकर सीधा संवाद किया। उन्होंने जीवन को बेहतर ढंग से जीने और सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए विद्यार्थियों को आठ महत्वपूर्ण सूत्र बताए। उन्होंने इन सभी बातों को आध्यात्मिक चेतना और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के सुंदर समन्वय के साथ समझाते हुए युवाओं को अपने विचारों, दैनिक आदतों और प्राथमिकताओं पर गंभीरता से विचार करने के लिए प्रेरित किया।
विद्यार्थियों को सफलता का मार्ग दिखाते हुए उन्होंने पहला मंत्र 'जैसी दृष्टि, वैसी सृष्टि' का दिया, जिसके तहत उन्होंने समझाया कि सकारात्मक नजरिया रखने पर ही परिस्थितियां अनुकूल बनती हैं। दूसरे मंत्र में उन्होंने 'बेहतर सोचिए, बेहतरीन बनिए' का संदेश देते हुए कहा कि उत्कृष्ट विचार ही व्यक्ति को असाधारण बनाते हैं। तीसरे सूत्र में उन्होंने समय और ऊर्जा के सही प्रबंधन पर जोर देते हुए कहा कि हर व्यक्ति को इस बात पर विचार करना चाहिए कि उसकी जिंदगी में किसकी कितनी जगह है।
चौथे मंत्र के जरिए उन्होंने युवाओं को मानसिक संबल देते हुए कहा कि 'असफलता केवल एक घटना है, वह आपकी पहचान नहीं हो सकती', इसलिए किसी भी मोड़ पर हार मानने के बजाय नए सिरे से प्रयास करना चाहिए। पांचवें सूत्र में उन्होंने स्पष्ट किया कि व्यक्ति की रोज की छोटी-छोटी आदतें और अभिरुचि ही उसका भविष्य तय करती हैं। इसके बाद छठे सूत्र में उन्होंने जीवन के लक्ष्य पर जोर देते हुए सवाल किया कि 'आप सफल हुए लेकिन किसलिए', यानी सफलता का उद्देश्य समाज और आत्म-कल्याण से जुड़ा होना चाहिए।
अंतिम दो सूत्रों में उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि केवल नौकरी या करियर बनाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसा जीवन जीना चाहिए जिस पर खुद को और समाज को गर्व हो सके। इसके साथ ही उन्होंने सफलता के साथ जीवन के वास्तविक उद्देश्य और संतुलन को सबसे आवश्यक पहलू बताया। उपस्थित छात्र-छात्राओं ने इन विचारों को करियर और व्यक्तिगत जीवन के लिए बेहद उपयोगी और प्रेरक बताया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान एवं 'वंदे मातरम' के समवेत गायन के साथ हुआ।














