जबलपुर। जबलपुर की सुप्रसिद्ध प्राकृतिक धरोहर 'बैलेंसिंग रॉक' के अस्तित्व और उसके आसपास की जमीन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मदन महल की पहाड़ियों पर स्थित टनों वजनी इस अनोखी चट्टान से महज 20 फीट की दूरी पर बहुमंजिला इमारत का निर्माण किया जा रहा है। मामले में विभागों के बीच जिम्मेदारी को लेकर विरोधाभासी बयान सामने आ रहे हैं, वहीं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जमीन पर अवैध कब्जे और हेरफेर का आरोप लगाया है।
30 एकड़ से सिमटकर 0.8 हेक्टेयर रह गई सरकारी जमीन!
सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. पीजी नाजपांडे ने भू-अभिलेखों के हवाले से बड़ा दावा किया है: वर्ष 1910 के राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार, खसरा नंबर 194 की करीब 30 एकड़ जमीन सरकारी मद में दर्ज थी। आरोप है कि समय के साथ मदन महल की पहाड़ियों पर अवैध कब्जे होते गए और सरकारी जमीन निजी स्वामित्व में दर्ज होती चली गई। अब बैलेंसिंग रॉक के आसपास केवल 0.8 हेक्टेयर (लगभग 2 एकड़) सरकारी जमीन ही शेष बची है।
विभागों की टालमटोल: जिम्मेदारी लेने से कतरा रहे अधिकारी
धरोहर के पास निर्माण अनुमति और सुरक्षा को लेकर विभागों का रवैया निराशाजनक है: रीजनल मैनेजर नवीन शर्मा के अनुसार, रॉक के संरक्षण की मुख्य जिम्मेदारी पुरातत्व विभाग की है। उन्होंने माना कि सामाजिक संगठनों की शिकायतें गंभीर हैं और इस संबंध में उच्च अधिकारियों को पत्र लिखा जाएगा। सीनियर गाइड राजकुमार ने स्पष्ट किया कि विभाग के पास केवल संग्रहालय का प्रभार है, जबकि बैलेंसिंग रॉक की देखभाल का जिम्मा सीधे जिला प्रशासन का है। नगर निगम के भवन अधिकारी शैलेंद्र सिंह कौरव ने कहा कि उन्हें रॉक के पास हो रहे निर्माण की कोई जानकारी नहीं है। शिकायत मिलने पर निर्माण अनुमति की जांच की जाएगी और अवैध पाए जाने पर कार्रवाई होगी।
भूकंप झेल चुकी चट्टान को अब मशीनों के कंपन से खतरा
लाखों-करोड़ों वर्ष पूर्व ज्वालामुखीय क्रियाओं और हवा-पानी के प्राकृतिक कटाव से बनी यह बैलेंसिंग रॉक 1935 और 1997 के 6.5 तीव्रता वाले भीषण भूकंपों में भी अडिग रही थी। आर्कियोलॉजिकल विशेषज्ञ मनोहर सिंह उईके का कहना है कि इमारत निर्माण में इस्तेमाल हो रही भारी मशीनों का कंपन (Vibration) इस नाजुक प्राकृतिक संतुलन को नुकसान पहुंचा सकता है। निर्माण के कारण प्राकृतिक जल निकासी बंद होने से चट्टान के आधार के पास पानी जमा हो सकता है, जिससे निचले हिस्से की मिट्टी और पत्थर कमजोर हो सकते हैं।
संरक्षणकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर जमीन के नामांतरण दस्तावेजों की जांच कराने और निर्माण कार्य पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है।
















