तिरुवनंतपुरम। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने बुधवार को सार्वजनिक खर्च की विधायी निगरानी को और मजबूत करने और सरकारों की जवाबदेही बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जनता के पैसे का हर एक रुपया पारदर्शी तरीके से और व्यापक जनहित में खर्च किया जाना चाहिए।केरल विधानसभा में आयोजित संसद और राज्य विधानसभाओं की लोक लेखा समितियों (पीएसी) के अध्यक्षों के दो दिवसीय सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए, बिड़ला ने कहा कि ऑडिट रिपोर्ट और सिफारिशों पर बिना किसी कार्रवाई के वर्षों तक लंबित नहीं रहना चाहिए।
लोकसभा अध्यक्ष ने बताया कि सम्मेलन में 'केरल प्रस्ताव' को अपनाया गया है, जो देश भर में पीएसी के कामकाज को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण रूपरेखा का काम करेगा।
उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्यों को वित्तीय प्रबंधन में सुधार करने, सार्वजनिक खर्च में अनुशासन सुनिश्चित करने और शासन को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए मिलकर काम करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, बुनियादी ढांचे, सामाजिक कल्याण और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में बजटीय आवंटन बढ़ रहा है।
इसलिए, यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि आवंटित धन का उपयोग उसी उद्देश्य के लिए किया जाए जिसके लिए वह दिया गया था, और उससे अपेक्षित परिणाम प्राप्त हों।
बिड़ला ने कहा कि सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन की निगरानी करने और उनकी गुणवत्ता, निरंतरता और परिणामों का आकलन करने में विधायी समितियों की अहम भूमिका होती है।
उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि ऑडिट रिपोर्ट अक्सर उचित फॉलो-अप के बिना लंबे समय तक लंबित रह जाती हैं। जहां नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) स्वतंत्र ऑडिट करते हैं, वहीं पीएसी की जिम्मेदारी इन निष्कर्षों की जांच करना और सिफारिशों पर समय रहते कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
लोकसभा अध्यक्ष ने विधायी समितियों के कामकाज को बेहतर बनाने के लिए तकनीक के व्यापक उपयोग पर भी जोर दिया।
उन्होंने सुझाव दिया कि राज्य विधानसभाओं को संसदीय समितियों के लिए उपलब्ध प्रणाली की तर्ज पर 'डिजिटल ऑडिट निगरानी प्लेटफॉर्म' विकसित करने चाहिए।
उन्होंने कहा कि तकनीकी बदलावों के साथ कदम मिलाने के लिए सीएजी और पीएसी के अधिकारियों को नियमित प्रशिक्षण मिलना चाहिए।
विधायकों के पास भी आधुनिक तकनीक का उपयोग करने के लिए आवश्यक कौशल होना चाहिए। हालांकि, उन्होंने आगाह किया कि तकनीक को मानवीय निर्णय लेने की प्रक्रिया में सहायक होना चाहिए, न कि उसकी जगह ले लेनी चाहिए। समितियों द्वारा उपयोग किए जाने वाले डेटा की सटीकता और निष्पक्षता भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
बिड़ला ने बताया कि सम्मेलन में 27 राज्यों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और अपने अनुभव और सुझाव साझा किए। विभिन्न राज्यों द्वारा अपनाई जा रही बेहतरीन कार्यप्रणालियों को साझा किया जाना चाहिए और अन्य जगहों पर भी लागू किया जाना चाहिए।
उन्होंने जोर देकर कहा कि वित्तीय अनुशासन और जवाबदेही के साझा लक्ष्य को हासिल करने में राजनीतिक और वैचारिक मतभेद आड़े नहीं आने चाहिए।
उन्होंने सम्मेलन के आयोजन में शामिल केरल विधानसभा अध्यक्ष तिरुवंचूर राधाकृष्णन, मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन और अन्य लोगों को धन्यवाद दिया। बिड़ला ने कहा कि केरल की लोकतांत्रिक परंपराएं और सामाजिक सुधार, शिक्षा तथा स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में उसका योगदान, इस बैठक के लिए उसे एक उपयुक्त स्थान बनाता है।

















