छतरपुर। जिले के बमीठा थाना अंतर्गत ग्राम धूरा में एक 90 वर्षीय वृद्ध की मौत के मामले में बमीठा पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। मामले में पीड़ित पति धर्मदास कुशवाहा ने पुलिस अधीक्षक (SP) को एक शिकायती आवेदन सौंपकर अपनी पत्नी कुसुम कुशवाहा उर्फ जुग्गी कुशवाहा को हत्या के झूठे मुकदमे में फंसाने का आरोप लगाया है। पीड़ित ने पूरे मामले की जांच किसी अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से कराकर अपनी निर्दोष पत्नी को जेल से रिहा कराने और न्याय दिलाने की मांग की है।


क्या है पूरा मामला? (खेत में विवाद और गिरने की घटना)

शिकायतकर्ता धर्मदास कुशवाहा के अनुसार: लगभग ढाई महीने पहले उनकी पत्नी कुसुम कुशवाहा अपने खेत पर थीं। इसी दौरान गांव के ही 90 वर्षीय वृद्ध गडुवा कुशवाहा वहां आकर गाय को पत्थर मार रहे थे। कुसुम द्वारा मना करने पर दोनों के बीच कहासुनी हुई थी। विवाद के बाद गडुवा कुशवाहा जब अपने खेत की ओर जा रहे थे, तभी पैर फिसलने या ठोकर लगने के कारण वे एक पत्थर पर गिर पड़े, जिससे उन्हें चोट आ गई थी। इस मामूली घटना की सूचना उसी समय बमीठा थाने को दे दी गई थी।


ऑपरेशन के दौरान हुई मौत, हत्या का मामला दर्ज

आवेदन में उल्लेख किया गया है कि 90 वर्षीय गडुवा कुशवाहा शारीरिक रूप से अत्यधिक कमजोर और बीमार थे। घटना के लगभग 16 दिन बाद जबलपुर में उनके पेट का ऑपरेशन हुआ था, लेकिन ऑपरेशन के अगले ही दिन अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। जबलपुर में ही पोस्टमार्टम कराने के बाद परिजन शव को गांव ले आए और अंतिम संस्कार कर दिया गया।


पुलिस और विपक्षी पर साठगांठ का आरोप

पीड़ित धर्मदास का आरोप है कि पुरानी रंजिश के चलते मृतक के बेटों (सरमन और किशोरी) ने बमीठा थाना पुलिस से सांठगांठ कर ली: पुलिस ने वृद्ध की स्वभाविक/बीमारी से हुई मौत को हत्या का रूप देते हुए कुसुम कुशवाहा के खिलाफ गंभीर धाराओं में अपराध दर्ज कर लिया। पुलिस ने कुसुम को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, और वे पिछले लगभग डेढ़ महीने से सलाखों के पीछे बंद हैं।


SP से गुहार: धर्मदास कुशवाहा का कहना है कि गडुवा कुशवाहा की मृत्यु किसी हमले से नहीं, बल्कि अत्यधिक उम्र, बीमारी और ऑपरेशन के बाद हुई जटिलताओं के कारण हुई है। बमीठा पुलिस ने दुर्भावनापूर्ण तरीके से उनकी पत्नी को फंसाया है। उन्होंने पुलिस अधीक्षक से निष्पक्ष जांच कराकर न्याय देने की मांग की है।