चंडीगढ़। भगवंत मान मंत्रिमंडल ने बुधवार को पंजाब वृक्ष संरक्षण विधेयक 2026 को मंजूरी दे दी। इस विधेयक का उद्देश्य पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने, पर्यावरण प्रदूषण को रोकने, वृक्षों की कटाई से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान की भरपाई के लिए संस्थागत व्यवस्था प्रदान करने और मृदा संरक्षण के लिए हरित आवरण को बनाए रखना है।

पंजाब एक कृषि प्रधान राज्य है, जिसका लगभग 83 प्रतिशत क्षेत्र कृषि के अंतर्गत आता है।

वन और वृक्ष आवरण के अंतर्गत कुल क्षेत्रफल लगभग 5.92 प्रतिशत है, और राज्य सरकार ने इसे 2030 तक 7.5 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है।

मंत्रिमंडल ने स्वैच्छिक अनुपालन को बढ़ावा देने, मुकदमेबाजी को कम करने और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने के लिए पंजाब वस्तु एवं सेवा कर (संशोधन) विधेयक 2026 में और संशोधन करने को भी मंजूरी दी, जिससे राज्य भर में व्यापार और उद्योग को लाभ होगा।

इस संशोधन से पूर्व समझौते की आवश्यकता के बिना क्रेडिट नोट जारी करके बिक्री के बाद मिलने वाली छूटों को आपूर्ति मूल्य से बाहर रखा जा सकेगा।

इसके अलावा, यह किसी भी व्यावसायिक कारण से बिक्री के बाद मिलने वाली छूटों के लिए क्रेडिट नोट जारी करने की अनुमति देगा, जिससे व्यापार छूट समायोजन सरल हो जाएगा और अनुपालन का बोझ कम हो जाएगा।

इसी प्रकार, इसका उद्देश्य इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर के मामलों में आईटीसी के 90 प्रतिशत अनंतिम रिफंड का लाभ देना और वस्तुओं के निर्यात पर भुगतान किए गए आईजीएसटी की वापसी की अनुमति देना भी है, भले ही रिफंड राशि 1,000 रुपए से कम हो, जिससे तरलता में सुधार हो और निर्यात को बढ़ावा मिले।

कैबिनेट ने ग्रामीण विकास विभाग के कामकाज को सुव्यवस्थित करने और पंचायत सचिवों और ग्राम सेवकों के कैडरों को मिलाकर पंचायत विकास सचिव का एक नया कैडर बनाने के लिए पंजाब पंचायती राज अधिनियम, 1994 में संशोधन को भी मंजूरी दी।