हैदराबाद। एआईएमआईएम अध्यक्ष और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने अमेरिका में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार अब्दुल एल-सैयद की जीत का जिक्र करते हुए उत्तर प्रदेश में मुस्लिम राजनीतिक पहचान मजबूत करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि अब उत्तर प्रदेश में भी "अब्दुल" नेता बनेगा।
ओवैसी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, "मिशिगन में एक 'अब्दुल' जीत गया है, अब उत्तर प्रदेश का 'अब्दुल' भी अपनी राजनीतिक पहचान मजबूत करे।"
वह अमेरिका के मध्यावधि चुनावों में मिशिगन सीनेट सीट पर अब्दुल एल-सैयद की जीत पर प्रतिक्रिया दे रहे थे। इस जीत के साथ अब्दुल एल-सैयद पहले मुस्लिम अमेरिकी सीनेटर बने हैं।
ओवैसी ने कहा कि "संघियों" ने 'अब्दुल' नाम का मजाक बनाने की कई कोशिशें कीं। उन्होंने कहा, "अब समय आ गया है कि हम दिखाएं कि 'अब्दुल' सिर्फ अल्लाह के सामने झुकता है। अब हम दूसरों के लिए कालीन बिछाने वाले नहीं रहेंगे।" उन्होंने यह मुद्दा अपनी पार्टी के मुख्यालय दारुस्सलाम में मीडिया से बातचीत के दौरान भी उठाया।
ओवैसी ने कहा, "भाजपा कहा करती थी कि 'अब्दुल पंचर बनाता है'। हम कह रहे हैं कि अब्दुल अब नेता बनेगा। वह न कालीन बिछाएगा, न आरएसएस से डरेगा और न किसी के सामने झुकेगा। अब्दुल अपना काम करेगा और नेता बनेगा।"
इस दौरान ओवैसी ने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में केंद्र सरकार द्वारा दिए गए उस पक्ष की आलोचना की, जिसमें नई दिल्ली के कृषि भवन परिसर में स्थित कदीमी मस्जिद को सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट (सीसीएस) के पुनर्विकास के लिए हटाने की बात कही गई है। ओवैसी ने कहा कि जब 1908 में लुटियंस दिल्ली का निर्माण शुरू हुआ था, तब कई गांवों की जमीन अधिग्रहित की गई थी लेकिन इन मस्जिदों का अधिग्रहण नहीं किया गया था।
उन्होंने कहा, "यह मस्जिद देश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का हिस्सा है। इसका निर्माण कृषि भवन से पहले हुआ था। यह पंजीकृत वक्फ संपत्ति है और सरकार इसकी मालिक नहीं है।"
ओवैसी ने केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरण रिजिजू से इस मुद्दे पर हस्तक्षेप करने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह मस्जिद दिल्ली के राष्ट्रीय राजधानी बनने और भारतीय संविधान लागू होने से भी पहले की है।
उन्होंने कहा, "अगर सरकार यह दावा करना चाहती है कि यह उसकी संपत्ति है, तो उसे वक्फ ट्रिब्यूनल में जाकर अपना पक्ष रखना चाहिए। यह पंजीकृत वक्फ संपत्ति है और कृषि भवन की संपत्ति नहीं है।"
ओवैसी ने केंद्र सरकार के उस तर्क की भी आलोचना की, जिसमें कहा गया था कि सरकारी संपत्ति पर मस्जिद का होना धर्मनिरपेक्षता के अनुरूप नहीं है।
उन्होंने सवाल किया, "क्या यही आपकी धर्मनिरपेक्षता है कि आप कानूनी संरक्षण प्राप्त एक पंजीकृत वक्फ संपत्ति को तोड़ना चाहते हैं?"
ओवैसी ने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेंट्रल विस्टा परियोजना का भूमि पूजन किया था। उन्होंने कहा, "एक तरफ सार्वजनिक परियोजना में एक धर्म की रस्मों से धर्मनिरपेक्षता को कोई समस्या नहीं होती लेकिन 1912 से पहले से मौजूद मस्जिद से समस्या हो जाती है।"
हैदराबाद की मतदाता सूची में अवैध प्रवासियों के न मिलने संबंधी जिला निर्वाचन अधिकारी आर.वी. कर्णन के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए ओवैसी ने पूछा, "अब अमित शाह क्या कहेंगे?"
उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं ने पहले हैदराबाद में "सर्जिकल स्ट्राइक" करने जैसे बयान दिए थे। ओवैसी ने आरोप लगाया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के कारण गरीब लोगों को काफी परेशानी हुई।
उन्होंने कहा कि एआईएमआईएम ने एसआईआर प्रक्रिया के दौरान सभी पात्र मतदाताओं की, उनके धर्म की परवाह किए बिना मदद की।













