छतरपुर, संदीप यादव। आज हम आपको एक ऐसा मामला बताने जा रहे हैं जो परिवार, जिम्मेदारी और बदलते रिश्तों के सवाल को फिर से सामने लाता है। उत्तर प्रदेश के ज्योति मौर्य मामले की यादें ताजा करते हुए छतरपुर में एक और चौंकाने वाली घटना सामने आई है। पत्नी की सरकारी नौकरी लगते ही पति को घर से निकालने और मारपीट का आरोप… आइए विस्तार से समझते हैं पूरी कहानी।


छतरपुर जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पति-पत्नी के रिश्तों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 32 वर्षीय पंकज अहिरवार ने आरोप लगाया है कि उन्होंने सालों मेहनत कर अपनी पत्नी को पढ़ाया-लिखाया, लेकिन पत्नी की वर्ग-1 शिक्षक पद पर नौकरी लगते ही उनका व्यवहार पूरी तरह बदल गया।


पंकज अहिरवार मूल रूप से महोबा के रहने वाले हैं। उन्होंने बताया कि 2018 में उनकी शादी हुई थी। उस समय न तो वह खुद नौकरी करते थे और न ही उनकी पत्नी। उन्होंने छोटे-मोटे काम किए, महोबा में कपड़ों का शोरूम चलाया और उसी कमाई से पत्नी की पढ़ाई कराई। करीब दो साल पहले पत्नी आरती अहिरवार की पीएमश्री उत्कृष्ट विद्यालय में सरकारी टीचर की नौकरी लग गई। इसके बाद पंकज ने अपना शोरूम बंद कर दिया और बच्चों की देखभाल पर ध्यान देना शुरू कर दिया। दंपती के तीन बच्चे हैं—बेटियां मिसिता और विधि तथा बेटा शिवांश।


पंकज का आरोप है कि नौकरी लगने के बाद पत्नी उन्हें अपने साथ रखने से इनकार करने लगीं। वह कहते हैं, “मेरे तीन बच्चे हैं। मैं बच्चों के साथ रहना चाहता था, लेकिन पत्नी मुझे घर में नहीं रखतीं। न खाना-पीना देती हैं और कहती हैं कि अपने घर महोबा जाओ और वहीं रहो।”


आज सुबह पीएनबी बैंक के सामने किराए के मकान में यह विवाद चरम पर पहुंच गया। पंकज के अनुसार, उनकी पत्नी आरती अहिरवार और उनके भाई वरदान अहिरवार ने डंडे से उनकी पिटाई कर दी। सिर में चोट लगने के बाद उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पंकज का आरोप है कि दोनों ने जबरदस्ती उन्हें घर से भगाने के लिए मारपीट की। उन्होंने यह भी दावा किया कि एक दिन जब उन्होंने पत्नी का मोबाइल चेक करना चाहा तो पत्नी ने नाटक किया कि जैसे उन्होंने मारपीट की हो, लेकिन मोबाइल नहीं दिखाया। आज की घटना में उनका फोन भी तोड़ दिया गया।


पंकज ने कहा, “अभी मैं कुछ नहीं कर रहा हूं। पत्नी की नौकरी लग गई है तो उनका हाव-भाव बदल गया है। इसलिए वह मुझे अपने साथ नहीं रखना चाहतीं।”


यह मामला सिर्फ एक पति-पत्नी के विवाद तक सीमित नहीं है। यह उन सवालों को भी उठाता है जो समाज में बार-बार उठते हैं—जब पत्नी की आर्थिक स्वतंत्रता बढ़ती है तो क्या परिवार के रिश्ते कमजोर पड़ने लगते हैं? क्या मेहनत कर पढ़ाने वाला पति अचानक बोझ बन जाता है? छतरपुर का यह मामला उत्तर प्रदेश के ज्योति मौर्य प्रकरण की याद दिलाता है, जहां भी पत्नी की नौकरी के बाद रिश्तों में कड़वाहट और आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला चला था।


अस्पताल में भर्ती पंकज अहिरवार का इलाज चल रहा है। आगे क्या होता है, यह समय बताएगा। लेकिन इस घटना ने एक बार फिर परिवार, जिम्मेदारी और बदलते सामाजिक समीकरणों पर गंभीर बहस छेड़ दी है।