भिंड, अक्षय जोशी। एमजेएम कॉलेज, भिंड में आयोजित गरिमामय साहित्यिक समारोह में वरिष्ठ गीतकार रामदत्त जोशी 'विकल' की नवीन कृति 'मॉझी लौट किनारे चल' का विधिवत विमोचन किया गया। कार्यक्रम में साहित्यकारों, शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं साहित्य प्रेमियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। वक्ताओं ने पुस्तक की विषयवस्तु, साहित्यिक महत्ता तथा गीतकार रामदत्त जोशी के रचनात्मक योगदान पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि यह कृति जीवन के विविध अनुभवों, मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक सरोकारों को प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त करती है।


अपने संबोधन में रामदत्त जोशी 'विकल' ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण है और लेखन का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों एवं संवेदनाओं को सशक्त बनाना भी है। उन्होंने पुस्तक के सृजन की प्रेरणा और अपनी रचनात्मक यात्रा से जुड़े अनुभव साझा किए। इस दौरान वे भावुक भी हो गए। कुछ माह पूर्व अपने पुत्र को खोने की असहनीय पीड़ा के बावजूद उन्होंने साहित्य साधना को निरंतर जारी रखते हुए अपनी नई पुस्तक पाठकों को समर्पित की। उपस्थित लोगों ने उनके साहित्यिक योगदान, संघर्ष और समर्पण की सराहना करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धा और सम्मान अर्पित किया।


समारोह के अंत में अतिथियों ने पुस्तक की मुक्तकंठ से प्रशंसा करते हुए इसे साहित्य जगत के लिए महत्वपूर्ण कृति बताया तथा रामदत्त जोशी 'विकल' को शुभकामनाएं दीं। आभार प्रदर्शन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।