हुबली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने शुक्रवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के रूट मार्च पर कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे की टिप्पणी का पलटवार किया। उन्होंने कहा कि वे बार-बार इस संगठन पर ध्यान देना बंद करें और इसके बजाय एक मंत्री के रूप में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करें।हुबली में पत्रकारों से बात करते हुए प्रह्लाद जोशी ने कहा कि आरएसएस के रूट मार्च कोई नई बात नहीं हैं। ये प्रियांक खड़गे के पिता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के समय से ही होते आ रहे हैं।
उन्होंने बताया कि जब मल्लिकार्जुन खड़गे और उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर जैसे कई नेता गृह मंत्री थे, तब भी आरएसएस के रूट मार्च हुए थे। उन्होंने प्रियांक खड़गे को सलाह दी कि वे इस मुद्दे का राजनीतिकरण करना बंद करें और अपनी अन्य महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों पर ध्यान दें।
जोशी ने कहा कि आरएसएस से जुड़े सवालों का जवाब खुद संगठन को ही देना चाहिए। कर्नाटक में सूखे की स्थिति, बिगड़ती कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों की कमी की ओर इशारा करते हुए, उन्होंने गृह मंत्री से आग्रह किया कि वे खाली बैठने के बजाय इन मुद्दों पर ध्यान दें।
पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया से जुड़े स्टिंग ऑपरेशन और पेन ड्राइव के जरिए दी गई धमकी के विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रह्लाद जोशी ने गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सिद्दारमैया पर इस्तीफा देने का दबाव बनाने के लिए पेन ड्राइव दिखाना चौंकाने वाला है और इससे कर्नाटक की गरिमा को ठेस पहुंची है।
उन्होंने कहा कि सिद्दारमैया के साथ राजनीतिक मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन उनके कद के एक वरिष्ठ नेता को पेन ड्राइव दिखाकर इस्तीफा देने के लिए मजबूर करना, चाहे वह राज्य के स्तर पर हो या कांग्रेस पार्टी के भीतर राजनीतिक मर्यादा के लिए नुकसानदेह है और यह राजनीतिक स्तर में गिरावट को दर्शाता है।
प्रह्लाद जोशी ने कांग्रेस आलाकमान से मांग की कि वे स्पष्ट करें कि इस पेन ड्राइव विवाद और सिद्दारमैया को दी गई धमकी के पीछे कौन है।
केंद्रीय मंत्री ने राज्य सरकार से यह भी आग्रह किया कि वह 'मांझे' (पतंग उड़ाने वाली डोर) की बिक्री और इस्तेमाल के खिलाफ सख्त कदम उठाए, क्योंकि कर्नाटक में इसके कारण लोगों की जान जाने की खबरें आई हैं।
उन्होंने सुझाव दिया कि मांझे की बिक्री और इस्तेमाल पर नजर रखने के लिए एक समर्पित पोर्टल शुरू किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पुलिस को इसकी आपूर्ति और इस्तेमाल पर कड़ी नजर रखनी चाहिए, इसे लाने और इस्तेमाल करने वालों की पहचान करनी चाहिए, आरोपियों को गिरफ्तार करना चाहिए और उनके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए।
प्रियांक खड़गे ने कहा था कि कर्नाटक पुलिस आरएसएस की गुलाम नहीं है कि बस उन्हें सुरक्षा मुहैया कराती रहे। उन्होंने जोर देकर कहा कि आरएसएस को मार्च निकालने की अनुमति पाने के लिए तय प्रक्रियाओं का पालन करना होगा।















