छतरपुर। केन-बेतवा लिंक परियोजना, मझगाय, रूंझ, नेगुवा और एनटीपीसी सहित विभिन्न परियोजनाओं से प्रभावित विस्थापित ग्रामीणों का 'चिता आंदोलन' मंगलवार को पांचवें दिन भी जारी रहा। लगातार बारिश के बावजूद आंदोलनकारी अपनी मांगों को लेकर धरना स्थल पर डटे रहे। जय किसान संगठन के बैनर तले चल रहे इस आंदोलन में आमरण अनशन, मिट्टी सत्याग्रह और जल सत्याग्रह भी जारी है।
आंदोलनकारियों के अनुसार सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर के आमरण अनशन का तीसरा दिन है, जबकि मिट्टी सत्याग्रह दूसरे दिन में प्रवेश कर गया है। वहीं मंगलवार से जल सत्याग्रह भी शुरू किया गया है। प्रदर्शनकारियों ने "न्याय दो या मार दो" के नारे लगाते हुए उचित मुआवजा, पुनर्वास और कथित अनियमितताओं की जांच की मांग दोहराई। आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि धरना स्थल पर पीने के पानी की उपलब्ध व्यवस्था बंद कर दी गई है, जिसके कारण महिलाएं, बच्चे और अन्य ग्रामीण दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। उनका दावा है कि इससे कई लोगों की तबीयत भी प्रभावित हो रही है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
धरना स्थल पर बिजावर तहसीलदार अभिनय शर्मा, सटई तहसीलदार इंद्र कुमार गौतम और किशनगढ़ थाना प्रभारी कमलजीत सिंह मवई के पहुंचने पर कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति बनी। आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि प्रशासन उनकी मांगों का समाधान करने के बजाय दबाव बनाने का प्रयास कर रहा है। साथ ही परियोजना से जुड़े मामलों में कथित भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच की मांग भी उठाई गई।सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने कहा कि जब तक वास्तविक विस्थापितों को न्याय, उचित मुआवजा और पुनर्वास नहीं मिलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने प्रशासन पर उनकी मांगों की अनदेखी करने का आरोप भी लगाया।
आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगें-
- सभी विस्थापित परिवारों को उचित मुआवजा और पुनर्वास।
- परियोजनाओं में कथित भ्रष्टाचार की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच।
- दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई।
- विस्थापितों के कथित उत्पीड़न पर रोक।
फिलहाल आंदोलन जारी है। प्रशासन की ओर से इन आरोपों और मांगों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। स्थिति पर प्रशासन की नजर बनी हुई है।




