मास्को। रूस नहीं चाहता कि ईरान परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) से खुद को अलग करे और उसे उम्मीद है कि तेहरान इस समझौते का हिस्सा बना रहेगा। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने मंगलवार को यह बात कही।
रॉयटर्स के अनुसार, पेस्कोव से ईरानी अधिकारियों की उन टिप्पणियों के बारे में पूछा गया था, जिनमें ईरान के एनपीटी से संभावित रूप से बाहर निकलने की बात कही गई है। इस संधि के तहत ईरान परमाणु हथियार बनाने या हासिल नहीं करने की प्रतिबद्धता जताता है।
पेस्कोव ने कहा, “इस बयान पर और स्पष्टीकरण की जरूरत है। हम नहीं चाहेंगे कि ईरान एनपीटी से हटे।”
ईरानी सांसदों ने देश के परमाणु कार्यक्रम को बंद करने के लिए बनाए जा रहे दबाव के जवाब में एनपीटी से हटने पर विचार करने की धमकी दी है। सोमवार को रिपोर्ट्स में कहा गया कि ईरानी संसद के उपाध्यक्ष अली निकजाद ने एक बार फिर इस संभावना का जिक्र किया।
ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण बताता रहा है, और हाल ही में राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने भी न्यूयॉर्क दौरे के दौरान कहा था कि उनका देश कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। हालांकि सीबीएस को दिए इसी इंटरव्यू में उन्होंने ये भी कहा कि तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम और अन्य मुद्दों पर बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन "धौंस या दबाव" को स्वीकार नहीं करेगा।
दूसरी ओर उसके यूरेनियम संवर्धन हथियार बनाने के स्तर के करीब पहुंचने को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठते रहे हैं। तेहरान इन आरोपों से इनकार करता है कि वह परमाणु हथियार विकसित करना चाहता है।
रूस और ईरान के बीच हाल के वर्षों में करीबी रणनीतिक संबंध विकसित हुए हैं। दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग संधि भी है। रूस ने इससे पहले भी ईरान के परमाणु मुद्दे के समाधान के लिए कूटनीतिक रास्ते पर जोर दिया है।














