सीधी। मध्य प्रदेश में एक बार फिर नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता और एडमिशन को लेकर विवाद गहराने लगा है। सीधी जिले के भदौरा स्थित 'आयुष्मान कॉलेज ऑफ नर्सिंग एंड पैरामेडिकल' को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। यह कॉलेज सीधी से भाजपा सांसद डॉ. राजेश मिश्रा के बेटे अनूप मिश्रा और उनकी बहू बीना मिश्रा से जुड़ा बताया जा रहा है। NSUI ने कॉलेज की अधूरी बिल्डिंग, फर्जी फैकल्टी और मापदंडों के उल्लंघन के गंभीर आरोप लगाते हुए सीबीआई (CBI) जांच की मांग की है।
शॉपिंग कॉम्प्लेक्स की दुकानों पर पोस्टर लगाकर मान्यता लेने का आरोप
NSUI के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार का आरोप है कि सीधी के इस कॉलेज की बिल्डिंग पहले एक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स थी, जिसमें लगभग 20 दुकानें थीं। संगठन द्वारा लगाए गए मुख्य आरोप: 24 जुलाई को हुए निरीक्षण से ठीक पहले दुकानों पर कॉलेज के बैनर-पोस्टर लगाकर पूरी बिल्डिंग को कॉलेज का रूप दे दिया गया। निरीक्षण के समय दूसरे संस्थानों से लैब के उपकरण लाकर सजाए गए। इसके अलावा फैकल्टी के अनुभव प्रमाण पत्रों में भी भारी हेरफेर की आशंका है। नर्सिंग काउंसिल के नियमानुसार कॉलेज के पास 23 हजार स्क्वायर फीट की बिल्डिंग होनी चाहिए, जो यहां मौजूद नहीं है। इसके बावजूद जिला प्रशासन और निरीक्षण दल की हरी झंडी के बाद B.Sc. नर्सिंग की 60 और GNM की 60 (कुल 120) सीटों की मान्यता दे दी गई।
कागजों में सांसद पुत्र प्रेसिडेंट, 22 छात्रों को अलॉट हुई सीटें
सामने आए दस्तावेजों के अनुसार, कॉलेज का संचालन करने वाली समिति में प्रेसिडेंट के तौर पर अनूप मिश्रा, वाइस प्रेसिडेंट के पद पर वैष्णवी मिश्रा और सेक्रेटरी के रूप में बीना मिश्रा का नाम दर्ज है। विवाद तब और गहरा गया जब अधूरी सुविधाओं के बावजूद काउंसलिंग के जरिए कॉलेज को GNM के 15 और B.Sc. नर्सिंग के 7 (कुल 22) छात्र आवंटित कर दिए गए। NSUI ने सवाल उठाया है कि बिना प्रयोगशाला, लाइब्रेरी और स्थायी फैकल्टी के भौतिक सत्यापन करने वाले अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध है और उनके खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज होनी चाहिए।
कॉलेज प्रबंधन का दावा- वायरल तस्वीरें पुरानी, सभी प्रक्रियाएं ऑनलाइन
विवाद पर आयुष्मान कॉलेज प्रबंधन ने आरोपों को खारिज करते हुए सफाई दी है: प्रबंधन का कहना है कि सोशल मीडिया पर जो अधूरी बिल्डिंग की फोटो वायरल हो रही है, वह लगभग चार महीने पुरानी है। फैकल्टी की नियुक्ति और अनुभव की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है, जिसमें गड़बड़ी की कोई गुंजाइश नहीं है। हालांकि, जब कॉलेज से सांसद पुत्र की मिल्कियत और नई बिल्डिंग की तस्वीरें मांगी गईं, तो प्रबंधन ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया।
2020 के बहुचर्चित नर्सिंग घोटाले की यादें हुईं ताजा
उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश में साल 2020 में एक बड़ा फर्जी नर्सिंग कॉलेज घोटाला उजागर हुआ था, जिसमें कागजों और किराए के एक-एक कमरे में चल रहे सैकड़ों कॉलेजों को मान्यता बांट दी गई थी। उस मामले की जांच वर्तमान में सीबीआई कर रही है। अब सीधी के इस नए मामले ने प्रदेश में एक बार फिर फर्जी नर्सिंग कॉलेजों के नेटवर्क पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।




