हरिद्वार। योग गुरु स्वामी रामदेव ने सनातन ग्रंथों के परिशोधन का बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि वेदों को छोड़कर बाकी सनातन ग्रंथों में मुगल और ब्रिटिश काल में हुई मिलावटों और गलत व्याख्याओं को दूर किया जाएगा। इसके लिए पतंजलि योगपीठ में शंकराचार्य, जगद्गुरु और सभी संप्रदायों के धर्माचार्यों की मौजूदगी में विद्वानों की बड़ी समिति बनेगी जो स्मृतियों, पुराणों, रामायण और महाभारत तक में हुए प्रक्षेप को हटाकर सनातन का शुद्धतम स्वरूप दुनिया के सामने रखेगी।योग गुरु स्वामी रामदेव ने कहा, "वेदों को छोड़कर बाकी सनातन ग्रंथों में जो मिलावट मुगल काल और ब्रिटिश काल के दौरान की गई है, उसके परिशोधन के लिए और कुछ गलत व्याख्याओं और उन लोगों द्वारा फैलाई गई भ्रांतियों के निवारण हेतु, जिन्हें सनातन का समग्र बोध नहीं है और जो सनातन को खंडित रूप में देखते हैं और उसके तत्वार्थ को नहीं समझते, सभी प्रकार की इन भ्रांतियों का निवारण किया जाएगा। सनातन का शुद्धतम स्वरूप पूरी दुनिया के सामने प्रस्तुत किया जाएगा।"

योग गुरु ने कहा कि इस अखिल भारतीय प्राच्य विद्या सम्मेलन का मूल तत्व यही है कि सनातन शाश्वत भी है और वर्तमान की चुनौतियों से लड़ने की शक्ति भी देता है। सनातन की विरासत और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के आधार पर आगे बढ़ते हुए हम एक विकसित और परम वैभवशाली भारत का निर्माण करेंगे। यही दृष्टि हमें सनातन से मिलती है। हर देश का एक मूल वैचारिक, दार्शनिक और सांस्कृतिक अधिष्ठान होता है। भारत की आत्मा सनातन है। भारत की आत्मा पर प्रहार करने वाले आत्मघाती लोग हैं, वे बौद्धिक, धार्मिक और सांस्कृतिक आतंकवादी हैं। अब उनका आतंक नहीं चलेगा।

योग गुरु ने कहा कि ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र जातियां नहीं हैं। वेदों में जातियों के नाम पर मनुष्य-मनुष्य, जड़-चेतन, जीव-जगत, स्त्री-पुरुष अथवा शूद्र के नाम पर कोई भेद नहीं है। वेदों, सनातन दर्शन, उपनिषद, रामायण, महाभारत और पुराणों का तत्वार्थ यह है कि सभी जातियां, सभी संप्रदाय, सारा ब्रह्मांड और सभी देवी-देवता हमारे भीतर हैं।

उन्होंने कहा कि इसके लिए सभी मठों, पंथों, संप्रदायों के प्रमुख धर्माचार्य, गुरुजन, पूज्य शंकराचार्य, जगद्गुरु एवं अन्य महापुरुषों के पावन सान्निध्य में विद्वानों की एक बहुत बड़ी समिति गठित की जाएगी, जो यह विचार करेगी कि सनातन का शुद्धतम स्वरूप पूरी दुनिया के सामने कैसे प्रस्तुत किया जाए। शास्त्रों में जो प्रक्षेप हुआ है, चाहे वह अलग-अलग स्मृति ग्रंथ हों, हमारे पुराण हों, रामायण और महाभारत तक में जो भी विभिन्न प्रकार की मिलावट हुई है, उसके निवारण के लिए कार्य किया जाएगा।

स्वामी रामदेव ने कहा कि जहां मिलावट नहीं भी हुई है, वहां भी अनेक लोग गलत तथ्यात्मक व्याख्याएं करके सनातन को बदनाम करते हैं। इन सभी भ्रांतियों को समाप्त करने के लिए शुक्रवार को पतंजलि योगपीठ, पतंजलि विश्वविद्यालय के प्रांगण से पूज्य शंकराचार्यों, जगद्गुरुओं, विद्वानों और महापुरुषों के सान्निध्य में एक बहुत बड़ा निर्णय लिया जाएगा। यदि भारत को पूरी दुनिया के सामने सम्मान के साथ खड़ा होना है, तो सभी देशवासियों को जात-पात, ऊंच-नीच, पक्ष-विपक्ष जैसी बातें छोड़कर यह सोचना होगा कि भारत की करेंसी दुनिया में नंबर-वन कैसे बने, भारत की अर्थव्यवस्था, जीडीपी, विकास दर, आर्थिक ताकत, वैज्ञानिक शक्ति और सैन्य शक्ति दुनिया में सर्वाधिक शक्तिशाली कैसे बने। इसके लिए व्यक्तिगत, सामाजिक और सरकारी स्तर पर प्रयास करने होंगे।

स्वामी रामदेव ने कहा कि भारत का गौरव, गरिमा और प्रतिष्ठा पूरी दुनिया में स्थापित होगी। अन्यथा कभी अमेरिका आंख दिखाएगा, कभी चीन, और कभी कोई अन्य देश हमारे शत्रुओं को उकसाएगा। इसलिए सभी भारतवासियों को यह विचार करना चाहिए कि पक्ष-विपक्ष और तमाम प्रकार के जातिगत और मजहबी विभाजनों से ऊपर उठकर भारत को शक्तिशाली कैसे बनाया जाए। मैंने कहा है कि सभी भारतीयों को सोचना पड़ेगा, "मैं भारत हूं, मैं भारत का लोकतंत्र हूं, मैं भारत का संविधान हूं।" इसकी भावना जब तक नहीं आएगी, तब तक केवल यह सोचते रहना कि मैं क्या बन जाऊं, मैं क्या पा लूं, पर्याप्त नहीं है। इसके बजाय यह दृष्टि होनी चाहिए कि मेरा देश क्या बन जाए।