उज्जैन। उज्जैन जिले के बड़नगर क्षेत्र में फर्जी डॉक्टरों और बिना रजिस्ट्रेशन के धड़ल्ले से चल रहे अवैध चिकित्सा संस्थानों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग की टीम ने एक बड़ी और सख्त कार्रवाई की है। इस कार्रवाई के दौरान एक बेहद चौंकाने वाला नजारा तब देखने को मिला, जब प्रशासन द्वारा सील किया गया एक निजी अस्पताल कुछ ही देर बाद दोबारा खुल गया। शनिवार को जैसे ही इसकी भनक स्वास्थ्य विभाग की टीम को लगी, अधिकारी तुरंत पुलिस बल के साथ दोबारा मौके पर पहुंचे और अस्पताल को फिर से पूरी तरह सील कर दिया। जांच में सामने आया कि इस अस्पताल का डॉक्टर होम्योपैथिक और आयुर्वेदिक डिग्री के भरोसे गंभीर मरीजों का धड़ल्ले से एलोपैथिक इलाज कर रहा था।
सोशल मीडिया के जरिए ऑनलाइन इलाज और अमानक दवाइयां बरामद
दरअसल, जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एके पटेल के निर्देशन में स्वास्थ्य विभाग की विशेष टीम ने शुक्रवार को बड़नगर तहसील के ग्रामीण व शहरी इलाकों में संचालित करीब एक दर्जन से अधिक अस्पतालों, पैथोलॉजी लैब और क्लीनिकों पर औचक दबिश दी थी। जांच टीम में शामिल डॉ. विक्रम रघुवंशी ने बताया कि खरसोद कला में संचालित 'वेदांता अस्पताल' के डॉक्टर संदीप यादव के पास केवल आयुर्वेदिक/होम्योपैथिक डिग्री है, जबकि वे अवैध रूप से बड़े पैमाने पर एलोपैथिक पद्धति से मरीजों का इलाज कर रहे थे। कार्रवाई के दौरान अस्पताल में मरीजों की भारी भीड़ लगी हुई थी। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि यह फर्जी डॉक्टर फेसबुक, इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए भी मरीजों को ऑनलाइन इलाज की सलाह दे रहा था। टीम ने अस्पताल परिसर से भारी मात्रा में अमानक (घटिया स्तर की) दवाइयां भी बरामद की हैं।
बिना रजिस्ट्रेशन और अमान्य डिग्री पर चली प्रशासन की कैंची
स्वास्थ्य विभाग की इस मैराथन जांच के दौरान पूरे बड़नगर क्षेत्र में हड़कंप मच गया। बिना वैध रजिस्ट्रेशन, अमान्य डिग्रियों और गंभीर लापरवाही के साथ मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वाले झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए टीम ने एक मेडिकल स्टोर, एक पैथोलॉजी लैब और निजी अस्पतालों सहित कुल 11 संस्थानों को सील कर दिया है।
एसडीएम की मौजूदगी में हुई कार्रवाई, आगे भी जारी रहेगी मुहिम
क्षेत्र में इस व्यापक कार्रवाई को अंजाम देने वाली स्वास्थ्य विभाग की टीम में डॉ. सोमेश प्रदीप, डॉ. विक्रम रघुवंशी, मेडिकल ऑफिसर सुयश श्रीवास्तव और विकास राजपूत मुख्य रूप से शामिल रहे। बड़नगर के चंद्रशेखर आजाद चौक स्थित डॉ. दीपांकर क्लीनिक पर जब सीलबंदी की कार्रवाई की जा रही थी, तब सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था के लिहाज से खुद बड़नगर एसडीएम धीरेंद्र पाराशर भी मौके पर मौजूद रहे। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में भोले-भाले मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वाले ऐसे फर्जी डॉक्टरों और अवैध क्लीनिकों के खिलाफ आने वाले दिनों में भी यह सख्त खोजी अभियान लगातार जारी रहेगा।




