धार। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच द्वारा भोजशाला को मंदिर घोषित किए जाने के बाद पहला शुक्रवार भक्ति और उल्लास का रहा। भोज उत्सव समिति द्वारा परिसर में विशेष वाग्देवी प्रतिमा स्थापित किए जाने के बाद सुबह से ही श्रद्धालु लगातार पहुंच रहे हैं। भक्त भजनों पर नृत्य कर अपनी खुशी जता रहे हैं और मां सरस्वती के दर्शन व पूजन में शामिल हो रहे हैं।


भोजशाला आंदोलन में जान गंवाने वाले कारसेवकों के परिजनों का भी समिति द्वारा सम्मान किया गया। अमृता सावन ने कहा कि वे पहली बार शुक्रवार को यहां आई हैं और अब पूरे वर्ष मां सरस्वती की पूजा करने का अवसर मिलने से बेहद प्रसन्न हैं। समिति के संरक्षक अशोक जैन ने इस दिन को 721 वर्षों के संघर्ष के बाद ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि अलाउद्दीन खिलजी द्वारा मंदिर पर कब्जा किए जाने के बाद से हिंदू समाज लगातार संघर्षरत था।


समिति ने स्पष्ट किया कि यह मुक्ति अभी अधूरी है। भोजकालीन पूर्ण वैभव और स्वरूप बहाल किए बिना आंदोलन जारी रहेगा। समिति ने लंदन से मां वाग्देवी की मूल प्रतिमा वापस लाने, गर्भगृह की इस्लामिक आयतों को हटाने और एएसआई सर्वे में मिली 94 देवी-देवताओं की मूर्तियों को स्थापित करने की मांगों वाला प्रतिवेदन केंद्र सरकार को भेजा है।


इधर, हाईकोर्ट के फैसले से निराश मुस्लिम पक्ष गुरुवार रात सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। काजी मोइनुद्दीन ने विशेष अनुमति याचिका दायर की। शहर काजी वकार सादिक ने कहा कि मुस्लिम समाज न्यायपालिका का सम्मान करता है और सुप्रीम कोर्ट से राहत की उम्मीद रखता है। उन्होंने सभी समुदायों से शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की।


शहर में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने कड़ी तैयारियां की हैं। करीब दो हजार पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। आठ विशेष सुरक्षा कंपनियों के साथ रैपिड एक्शन फोर्स, पैरामिलिट्री फोर्स और अन्य सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। पुलिस की विशेष टीम सोशल मीडिया पर भी निगरानी रख रही है। कलेक्टर राजीव रंजन मीना ने नागरिकों से सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने की अपील की।


भोज उत्सव समिति के सदस्य गोपाल शर्मा ने कहा कि जब तक भोजशाला राजा भोज के काल जैसी नहीं हो जाती, संघर्ष जारी रहेगा।