जबलपुर। मध्य प्रदेश के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के लाखों छात्रों के लिए एक ऐतिहासिक और बड़ी खबर सामने आई है। लगभग 8 साल (2017 से) के लंबे इंतजार के बाद राज्य में छात्र संघ चुनाव का रास्ता पूरी तरह से साफ हो गया है। जबलपुर हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने सत्र 2026-27 का आधिकारिक एकेडमिक कैलेंडर कोर्ट के सामने पेश किया, जिसमें सितंबर 2026 में चुनाव कराने का स्पष्ट शेड्यूल दिया गया है। अदालत ने इस एकेडमिक कैलेंडर को ऑन-रिकॉर्ड लेते हुए स्पष्ट निर्देश दिया कि छात्र संघ का गठन केवल चुनाव प्रक्रिया के माध्यम से ही कराया जाए। इसके साथ ही कोर्ट ने लंबे समय से पेंडिंग याचिका का भी निपटारा कर दिया।
एकेडमिक कैलेंडर 2026-27: मुख्य गतिविधियां और तारीखें
उच्च शिक्षा विभाग द्वारा हाईकोर्ट में पेश किए गए शेड्यूल के अनुसार:
सितंबर 2026 में छात्र संघ चुनाव और गठन। नवंबर 2026 तक होगी खेलकूद, एनसीसी (NCC), एनएसएस (NSS), युवा उत्सव व अन्य गतिविधियां। फरवरी 2027 (पहला सप्ताह) में वार्षिक स्नेह सम्मेलन, पुरस्कार वितरण और वार्षिक पत्रिका का प्रकाशन।
पढ़ाई और परीक्षाओं का तय शेड्यूल
कैलेंडर के अनुसार शैक्षणिक गतिविधियों और परीक्षाओं का समय भी निर्धारित किया गया है:
स्नातकोत्तर (PG) 1st & 3rd सेमेस्टर की कक्षाएं 1 जुलाई 2026 से 12 नवंबर 2026 तक। आंतरिक मूल्यांकन अगस्त के प्रथम सप्ताह से सितंबर के अंतिम सप्ताह तक। प्रायोगिक (Practical) परीक्षाएं 20 अक्टूबर से 5 नवंबर 2026 तक। सेमेस्टर परीक्षाएं 18 नवंबर से 10 दिसंबर 2026 तक। परिणाम घोषणा 31 दिसंबर 2026 तक।
2nd & 4th सेमेस्टर: कक्षाएं दिसंबर से अप्रैल तक चलेंगी, और अंतिम परिणाम जून 2027 तक जारी किए जाएंगे।
"कानून-व्यवस्था के नाम पर चुनाव नहीं रोक सकते": हाईकोर्ट का सख्त रुख
सुनवाई के दौरान जब विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से यह तर्क दिया गया कि चुनावों के दौरान कानून और सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है, तो हाईकोर्ट ने कड़ा जवाब दिया: यदि आवश्यकता हो तो पुलिस सुरक्षा ली जाए, लेकिन सुरक्षा या कानून व्यवस्था का बहाना बनाकर चुनाव को रोका नहीं जा सकता। छात्र संघ का गठन चुनाव के माध्यम से ही कराया जाना सुनिश्चित हो।
2017 से बंद थी प्रक्रिया; 2 साल की कानूनी लड़ाई के बाद मिली सफलता
मध्य प्रदेश में साल 2017 के बाद से छात्र संघ चुनाव बंद थे। इस मामले में वर्ष 2024 में जबलपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिकाकर्ता व एनएसयूआई के अधिवक्ता अदनान अंसारी ने बताया कि 2 साल चली इस कानूनी लड़ाई के बाद कोर्ट के दबाव में सरकार ने सितंबर 2026 का कैलेंडर बनाकर प्रस्तुत किया, जिसे अब अदालत की सहमति और निर्देश मिल गए हैं।
छात्र राजनीति और युवाओं के लिए क्यों महत्वपूर्ण है फैसला?
पिछले 8 वर्षों से चुनाव न होने के कारण प्रदेश में छात्र नेतृत्व की नई पीढ़ी तैयार नहीं हो पा रही थी। यह फैसला इसलिए भी खास है क्योंकि: छात्रों को अपनी समस्याओं (फीस, हॉस्टल, लाइब्रेरी आदि) को उठाने के लिए आधिकारिक प्रतिनिधि मिलेंगे।छात्र संघ चुनाव को राज्य और देश की मुख्यधारा की राजनीति की पहली नर्सरी माना जाता है।




