दमोह, राजेन्द्र तिवारी। सागर के बंडा में जहरीली शराब कांड से कई चिताएं ठंडी भी नहीं हुईं, दर्जनों घरों में मातम पसरा है, तेरहवीं तक के आंसू नहीं सूखे... और ठीक बगल के जिले दमोह में सत्ताधारी दल के माननीयों की ऐसी असंवेदनशीलता सामने आई है जिसने पूरे बुंदेलखंड को शर्मसार कर दिया है! जिस ढाबे पर अवैध शराब को लेकर पुलिस से अभद्रता हुई, उसी बदनाम कक्कू ढाबा पर बीजेपी के कद्दावर नेता और जिला पंचायत अध्यक्ष के पति गौरव पटेल का भव्य जन्मदिन मनाया गया। हद तो तब हो गई जब महफ़िल में बंडा शराब त्रासदी पर फूहड़ गीत गाए गए और सांसद राहुल सिंह लोधी से लेकर पिछड़ा वर्ग आयोग अध्यक्ष रामकृष्ण कुसमरिया तक जश्न की तालियों में डूबे नजर आए।
दमोह जिले से आई यह तस्वीर संवेदनहीनता की सारी हदें पार करने वाली है। जब जनप्रतिनिधियों को जनता के दुख का सहारा बनना चाहिए, तब वे गमज़दा परिवारों के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम कर रहे हैं। स्क्रीन पर दिख रहे यह चेहरे हैं दमोह जिला पंचायत अध्यक्ष रंजीता पटेल के पति और बीजेपी के दिग्गज नेता गौरव पटेल। मौका था 12 सितंबर को नेताजी के जन्मदिन के भव्य जश्न का। लेकिन यह जश्न कहां मनाया गया, यह जानकर आप दंग रह जाएंगे। पार्टी का वेन्यू बना पथरिया विधानसभा का वही 'कक्कू ढाबा', जहां कुछ ही दिन पहले अवैध शराब की सूचना पर छापा मारने पहुंची पुलिस टीम के साथ ढाबा संचालक ने सरेआम गाली-गलौज और अभद्रता की थी। जिस ढाबे के संचालक पर शासकीय कार्य में बाधा और अवैध शराब के संगीन मुकदमे दर्ज हैं, उसी के प्रांगण में जिले के रसूखदारों के लिए रेड कार्पेट बिछाया गया।
पार्टी में गाना-बजाना सामान्य हो सकता था, लेकिन जब पड़ोसी जिले सागर के बंडा में जहरीली शराब से एक दर्जन से अधिक लोग काल के गाल में समा चुके हों, घरों के चूल्हे बुझे हों, तब इस महफ़िल में जो बुंदेली गीत गूंजा, उसने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया। पार्टी के वायरल वीडियो में ढोलक की थाप पर यह बोल गाए जा रहे थे कि पौआ ने पियो घने-घने... बंडा में मर गये कैऊ जने....
मासूमों की चिताओं और बेबस रोते अनाथ बच्चों की चीखों के बीच, सत्ता के गलियारों में बैठे ये माननीय इस गीत पर मुस्कुराते और जश्न मनाते रहे। क्या किसी त्रासदी और मौतों का ऐसा क्रूर उपहास उड़ाया जा सकता है? सवाल सिर्फ एक नेता के जन्मदिन का नहीं है। सवाल उन बड़े चेहरों की मौजूदगी का है जो कानून और समाज के रहनुमा बनते हैं। इस पार्टी में दमोह सांसद राहुल सिंह लोधी और राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया सहित कई आला जनप्रतिनिधियों ने शिरकत की। विडंबना देखिए बंडा शराब त्रासदी में जान गंवाने वालों में सबसे बड़ी तादाद लोधी समाज के गरीबों की है। जिस समाज के परिवार आज अपने अपनों को खोकर आंसू बहा रहे हैं, उसी समाज की नुमाइंदगी करने वाले बड़े नेता इस विवादित ढाबे पर बैठकर शराब कांड के गीतों पर ठहाके लगा रहे थे।
जिस ढाबा संचालक पर पुलिस पर हमले और अवैध शराब का केस दर्ज हो, जब उसके आंगन में सांसद, आयोग अध्यक्ष और सत्ता के दिग्गज महफ़िल सजाएंगे, तो खाकी वर्दी वाले ईमानदार पुलिसकर्मियों का मनोबल कैसे बचेगा? क्या ऐसे मामलों में पुलिस कभी निष्पक्ष कार्रवाई कर पाएगी? और सबसे बड़ा सवाल यह कि अगर इन मरने वालों में किसी गरीब, मजदूर और आदिवासी की जगह कोई बड़ा राजनेता या पूंजीपति होता, तो क्या तब भी ढाबों पर ऐसे ही बेशर्म ठहाकों के साथ जश्न मनाया जाता? जवाब शायद सत्ता के घमंड में गुम है।




