राजगढ़। मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में स्थित ब्यावरा रेलवे स्टेशन को 'अमृत भारत स्टेशन' योजना के तहत करीब 20 करोड़ रुपए की लागत से आधुनिक बनाया जा रहा है। स्टेशन की बाहरी चमक-दमक तो बढ़ रही है, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था की हालत बेहद खस्ताहाल और चौंकाने वाली है। आलम यह है कि यहां मौजूद आरपीएफ (RPF) और जीआरपी (GRP) थानों में पकड़े गए अपराधियों को रखने के लिए एक लॉकअप तक नहीं है। मजबूरी में पुलिस जवानों को आरोपियों को कुर्सी से बांधकर पूरी रात जागकर पहरा देना पड़ता है।


10x15 के छोटे से कमरे में सिमटा RPF थाना

आरपीएफ का पूरा थाना महज 10 बाय 15 फीट के एक छोटे से कमरे में चल रहा है। इसी सीमित जगह में थाना प्रभारी का केबिन है, स्टाफ बैठता है और सारे दफ्तरी काम व रिकॉर्ड रखे जाते हैं। जगह न होने के कारण अगर कोई आरोपी पकड़ा जाता है, तो उसे दफ्तर के भीतर ही कुर्सी से बांधकर बैठाना पड़ता है। ताला लगाने की कोई व्यवस्था न होने से पूरी रात दो जवानों को पहरेदारी करनी पड़ती है। अगर किसी दिन एक साथ तीन-चार आरोपी पकड़े जाएं, तो उन्हें कहां रखा जाएगा, इसका कोई विकल्प नहीं है।


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जीआरपी थाने की हालत 'कालकोठरी' जैसी

स्टेशन पर जीआरपी थाने के हालात तो आरपीएफ से भी बदतर हैं। स्टेशन के निर्माण कार्य के चलते जीआरपी को पुरानी इमारत के तलघर में शिफ्ट कर दिया गया है। दो संकरे और अंधेरे कमरों में चल रहा यह थाना किसी कालकोठरी जैसा नजर आता है, जिसे किसी आम यात्री के लिए ढूंढना भी बहुत मुश्किल है। यहां भी लॉकअप नहीं है और आरोपियों को कुर्सी से बांधने की ही लाचारी है। बीते तीन सालों में कई बार नए थाने के लिए जमीन चिह्नित करने की बातें तो हुईं, लेकिन काम आज तक शुरू नहीं हो सका।


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दीवार ताक रहे सीसीटीवी कैमरे, सुरक्षा राम भरोसे

सुरक्षा तंत्र की इस नाकामी में बंद पड़े सीसीटीवी कैमरों ने रही-सही कसर भी पूरी कर दी है। स्टेशन पर निगरानी के लिए लगे अधिकतर कैमरे लंबे समय से ठप पड़े हैं और जो चालू हैं, उनका रुख यात्री प्लेटफॉर्म की बजाय दीवारों की तरफ है। आपात स्थिति में फुटेज हासिल करना भी कठिन चुनौती है। डीआरएम द्वारा संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाए जाने के बावजूद अब तक स्थिति जस की तस है। इस पूरे मामले पर ब्यावरा आरपीएफ के थानाप्रभारी धर्म सिंह का कहना है कि लॉकअप न होने के कारण आरोपी को थाने में ही बैठाना पड़ता है। नए थाने के लिए जगह देखी गई है और सीसीटीवी कैमरों को ठीक कराने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित कर दिया गया है।