गुना। मध्य प्रदेश के गुना जिले अंतर्गत मधुसूदनगढ़ में बस स्टैंड का बहुप्रतीक्षित निर्माण कार्य अब क्षेत्रीय राजनीति का अखाड़ा बन चुका है। क्षेत्र के विकास और जनसुविधा से जुड़ा यह महत्वपूर्ण मुद्दा सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दो प्रमुख नेताओं के बीच वर्चस्व की जंग में तब्दील हो गया है। चाचौड़ा क्षेत्र की विधायक प्रियंका मीना और भाजपा जिला मंत्री रुद्रदेव सिंह के बीच इस मामले को लेकर खुला टकराव देखने को मिल रहा है।


विधायक ने कसा तंज: निजी जमीन बचाने के लिए भोपाल रोड का चयन

विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब 'मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान' के एक मंच से विधायक प्रियंका मीना ने तीखे तेवर दिखाते हुए सार्वजनिक बयान दिया। विधायक ने आरोप लगाया कि कुछ असामाजिक तत्व और प्रभावशाली लोग अपने निजी हितों और आसपास की जमीनों को लाभ पहुंचाने के लिए भोपाल रोड पर बस स्टैंड का निर्माण कराना चाहते हैं। विधायक प्रियंका मीना का रुख है कि भोपाल रोड के बजाय किसी अन्य सुगम और उपयुक्त स्थल पर बस स्टैंड का निर्माण किया जाना चाहिए।


जिला मंत्री का पलटवार: जमीन साबित हुई तो राजनीति छोड़ दूंगा

विधायक के सार्वजनिक बयान के बाद भाजपा जिला मंत्री रुद्रदेव सिंह ने कड़ा ऐतराज जताते हुए सीधा पलटवार किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित भूमि या उसके आसपास उनकी अथवा उनके परिवार की कोई भी निजी जमीन नहीं है। रुद्रदेव सिंह ने दो टूक शब्दों में चुनौती देते हुए कहा कि यदि प्रस्तावित स्थल के पास उनकी निजी जमीन का कोई भी स्वामित्व साबित हो जाता है, तो वे तत्काल सक्रिय राजनीति से संन्यास ले लेंगे।


चार साल पहले आवंटित हुई थी जमीन, मंदिर का भी है पेंच

मधुसूदनगढ़ में बस स्टैंड निर्माण का यह पेंच करीब चार वर्ष पुराना है। तत्कालीन जिला कलेक्टर द्वारा भोपाल रोड स्थित शासकीय भूमि को बस स्टैंड निर्माण के लिए विधिवत आवंटित किया गया था। इसी प्रस्तावित स्थल के समीप कुशवाहा समाज का प्रतिष्ठित लवकुश मंदिर भी स्थित है, जिसको लेकर भी स्थानीय स्तर पर अलग-अलग राय बनी हुई है। विधायक जहां स्थान परिवर्तन पर अड़ी हैं, वहीं पूर्व से चिन्हित जमीन को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक खींचतान जारी है।


नेताओं की तकरार में पिसी जनता, फाइलों में अटका प्रोजेक्ट

एक ही दल के दोनों दिग्गज नेताओं के बीच आपसी तालमेल की कमी और खींचतान के चलते बस स्टैंड निर्माण का प्रस्ताव अधर में लटका हुआ है। प्रशासनिक अमला भी इस राजनीतिक टकराव के बीच कोई अंतिम निर्णय लेने से बच रहा है। नेताओं की इस नूराकुश्ती का सीधा खामियाजा मधुसूदनगढ़ की आम जनता, यात्रियों और बस संचालकों को भुगतना पड़ रहा है, जिन्हें वर्षों बाद भी एक व्यवस्थित बस स्टैंड की सुविधा मयस्सर नहीं हो सकी है।