भोपाल। मध्य प्रदेश के व्यापारिक जगत में डिजिटल ट्रांजेक्शन पर शुल्क लगाने के प्रस्ताव को लेकर आक्रोश चरम पर पहुंच गया है। इंदौर, भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर सहित राज्य के तमाम बड़े शहरों में आज (23 सितंबर 2026) विभिन्न व्यापारी संगठनों द्वारा ‘नो UPI डे’ मनाया जा रहा है। इस देशव्यापी और प्रदेशव्यापी विरोध के तहत कारोबारी अपने-अपने प्रतिष्ठानों पर UPI QR कोड से डिजिटल भुगतान स्वीकार नहीं कर रहे हैं और ग्राहकों से केवल नकद (कैश) लेनदेन की अपील कर रहे हैं। इस आंदोलन का केंद्र इंदौर बना हुआ है, जहां 125 से अधिक व्यापारिक संघों और लगभग 2 लाख व्यापारियों ने इसमें सीधे शामिल होने का दावा किया है।
रीगल स्क्वायर पर व्यापारियों का प्रदर्शन, इंदौर के प्रमुख बाजार पूरी तरह शामिल
विरोध प्रदर्शन की शुरुआत मंगलवार देर रात इंदौर के रीगल स्क्वायर से हुई, जहां 'टाइल्स एंड सेनेटरी वेयर व्यापारी एसोसिएशन' के बैनर तले 150 से अधिक कारोबारियों ने प्रस्तावित UPI शुल्क के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। आज सुबह से ही इंदौर के ऐतिहासिक सराफा बाजार, कतरन कपड़ा बाजार, बर्तन बाजार और मारोठिया बाजार जैसे प्रमुख थोक व खुदरा व्यापारिक केंद्रों में व्यापारी ग्राहकों से नकद राशि ही ले रहे हैं। कारोबारियों का कहना है कि डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देने की बात कहने वाली सरकार अब डिजिटल भुगतान पर ही आर्थिक चाबुक चलाने की तैयारी कर रही है, जिसे छोटे व मध्यम व्यापारी कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे।
किस नियम का हो रहा विरोध? 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर 0.4% MDR का प्रस्ताव
व्यापारी संगठनों के अनुसार, 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शुल्क लागू करने की तैयारी है। इसी फैसले को लेकर प्रदेशभर के कारोबारी आंदोलित हैं: थोक व्यापार में 90% से अधिक लेनदेन ₹2,000 से ऊपर के होते हैं। व्यापारियों का गणित है कि ₹75,000 के एक एकल UPI लेनदेन पर लगभग ₹300 तक का अतिरिक्त शुल्क कट जाएगा, जिससे उनका मार्जिन पूरी तरह खत्म हो जाएगा। व्यापारी संगठनों का अनुमान है कि यदि यह नियम लागू होता है, तो अकेले भोपाल और इंदौर के व्यापारियों पर ही हर महीने लगभग ₹14.4 करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा। किराना, कपड़ा, सराफा और पेट्रोल पंप जैसे व्यवसायों में पहले से ही लाभ का प्रतिशत 1 से 2% होता है, ऐसे में 0.4% शुल्क देने से व्यापार घाटे में चला जाएगा।
16 अक्टूबर से पेट्रोल पंपों पर भी ₹2,000 से ऊपर के UPI भुगतान पर रोक का ऐलान
व्यापारियों के इस आंदोलन को मध्य प्रदेश पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन ने भी अपना पूर्ण समर्थन दिया है। एसोसिएशन ने बड़ा फैसला लेते हुए घोषणा की है कि यदि यह शुल्क प्रस्ताव वापस नहीं लिया गया, तो आगामी 16 अक्टूबर से मध्य प्रदेश के सभी पेट्रोल पंपों पर ₹2,000 से अधिक का ईंधन डलवाने पर केवल नकद (Cash) भुगतान ही स्वीकार किया जाएगा और UPI स्वीकार नहीं होगा। पेट्रोल पंप संचालकों के इस कदम से आम वाहन चालकों और भारी वाणिज्यिक वाहन मालिकों को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
सरकार से प्रस्तावित शुल्क वापस लेने की मांग
व्यापारी महासंघों का कहना है कि UPI ने देश में बैंकिंग को सुगम बनाया था, लेकिन उस पर टैक्स या MDR चार्ज लगाना डिजिटल अर्थव्यवस्था के मूल उद्देश्य पर आघात है। फिलहाल मध्य प्रदेश के सभी प्रमुख व्यापारिक मंडलों ने केंद्र सरकार, वित्त मंत्रालय और एनपीसीआई (NPCI) से प्रस्तावित 0.4% MDR शुल्क के फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग की है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आज के ‘नो UPI डे’ के बाद शासन और संबंधित एजेंसियां क्या रुख अपनाती हैं।













