नई दिल्ली। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ब्लूमबर्ग द्वारा भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग पर उठाए गए सवाल का जवाब देते हुए कहा कि मोबाइल फोन के लिए लाई गई प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) स्कीम से देश में बड़े स्तर कर आय और रोजगार सृजित हुए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में, वैष्णव ने कहा कि मोबाइल पीएलआई प्रोग्राम से सरकार और अर्थव्यवस्था को काफी फायदा हुआ है।
केंद्रीय मंत्री के अनुसार, सरकार ने इस योजना के तहत 19,000 करोड़ रुपए के इंसेंटिव दिए हैं, जबकि इस सेक्टर से प्रत्यक्ष कर संग्रह 25,000 करोड़ रुपए और जीएसटी संग्रह 3 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है।
केंद्रीय मंत्री ने इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर से पैदा हुए रोजगार पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग से फिलहाल लगभग 25 लाख लोगों को रोजगार मिला हुआ है, जिसमें से अकेले मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग से करीब 12 लाख नौकरियां जुड़ी हैं।
वैष्णव का यह बयान ब्लूमबर्ग के एक विश्लेषण के जवाब में आया है, जिसमें सवाल उठाया गया था कि क्या चीन की तरह इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में सफलता पाने की भारत की कोशिश से अपेक्षित आर्थिक लाभ मिल पाएंगे।
रिपोर्ट में बताया गया है कि भले ही भारत स्मार्टफोन (आईफोन सहित) के लिए एक बड़े मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में उभरा है, लेकिन देश अभी भी प्रोसेसर, मेमोरी चिप, बैटरी और कैमरा लेंस जैसे आयातित पुर्जों पर काफी हद तक निर्भर है।
विश्लेषण में कहा गया कि अब हर चार में से लगभग एक आईफोन भारत में बन रहा है, लेकिन साथ ही यह भी कहा गया है कि देश के भीतर 'वैल्यू एडिशन' अभी भी सीमित है, क्योंकि कई महत्वपूर्ण पुर्जे विदेशों से मंगाए जाते हैं।
ब्लूमबर्ग ने पीएलआई योजना के तहत दी जाने वाली सरकारी सब्सिडी की ओर भी इशारा किया है। उनका तर्क है कि निर्माताओं को आकर्षित करने और उत्पादन की अधिक लागत की भरपाई करने के लिए भारत शायद बहुत बड़ी रकम खर्च कर रहा है।















