इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज में पदस्थ हेड कॉन्स्टेबल (ड्राइवर) फिरोज खान से जुड़े आय से अधिक संपत्ति के मामले में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। लोकायुक्त की जांच में अब तक कुल 51 अचल संपत्तियों का पता चला है, जिनका अनुमानित बाजार मूल्य 68 करोड़ रुपये से अधिक आंका गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए भविष्य में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा भी इसमें मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
क्या है पूरा मामला और संपत्तियों का दायरा?
आरोपी हेड कॉन्स्टेबल ने सरकारी सेवा में रहते हुए कथित तौर पर आय के ज्ञात स्रोतों से कई गुना अधिक संपत्ति अर्जित की है। इसमें मुख्य रूप से जमीन के बड़े सौदे और कंपनियां खड़ी किए जाने के साक्ष्य सामने आए हैं। लोकायुक्त जांच के दायरे में परिवार के सदस्यों, परिचितों और कई कंपनियों के नाम दर्ज संपत्तियां भी शामिल हैं। उदाहरण के लिए, हाल ही में देवास जिले के राजोदा गांव में 1.15 हेक्टेयर कृषि भूमि दो महिलाओं (रोशनी वर्मा और रानू कुशवाह) के नाम दर्ज मिली है, जिसका बाजार मूल्य करीब 2.30 करोड़ रुपए है।
लोकायुक्त की जांच प्रक्रिया
वर्तमान में लोकायुक्त पुलिस निम्नलिखित पहलुओं पर गहनता से पड़ताल कर रही है: संपत्तियों से जुड़े तमाम दस्तावेज, बैंक खाते और निवेश के स्रोत। क्या ये संपत्तियां भ्रष्टाचार से अर्जित रकम से खरीदी गईं और क्या इनके स्रोत को छिपाने के लिए इन्हें अन्य लोगों या कंपनियों के नाम पर रखा गया? संपत्तियों की कुल खरीद लागत, वैध आय, ऋण और वास्तविक स्वामित्व का सत्यापन।
क्या इस मामले में ED (प्रवर्तन निदेशालय) कर सकता है कार्रवाई?
कानूनी जानकारों और प्रावधानों के मुताबिक, इस मामले में ED की एंट्री की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता, हालांकि इसकी एक तय कानूनी प्रक्रिया है: लोकायुक्त की विवेचना पूरी होने और कोर्ट में चालान पेश होने के बाद ही ED द्वारा प्रक्रिया आगे बढ़ाने की संभावना रहती है, ताकि जांच एजेंसी को पर्याप्त और ठोस आधार मिल सके। मनी लॉन्ड्रिंग का मामला बनने के लिए यह स्थापित होना जरूरी है कि संपत्ति किसी 'अनुसूचित अपराध' (जैसे भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13 के तहत लोकसेवक द्वारा अवैध संपत्ति रखना) से जुड़ी आपराधिक गतिविधि से अर्जित हुई है। केवल संपत्तियों का बड़ा मूल्य सामने आना या आय से अधिक संपत्ति का आरोप लगना अपने आप में मनी लॉन्ड्रिंग साबित नहीं करता। ED के लिए यह साबित करना होगा कि खरीद के लिए पैसे किसने दिए, भुगतान किन खातों से हुआ और वास्तविक नियंत्रण किसका था।
फिलहाल, पूरा मामला लोकायुक्त की चल रही जांच पर टिका है। आगे के साक्ष्यों और कानूनी कार्रवाई के आधार पर ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि यह मामला PMLA के दायरे में किस सीमा तक आगे बढ़ता है।















