भोपाल, जीतेन्द्र यादव। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में शिक्षा व्यवस्था की स्थिति और भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है। प्रदर्शनकारियों ने राज्य सरकार की शिक्षा नीतियों पर कड़ा एतराज जताते हुए आईटीआई भर्ती प्रक्रिया से लेकर डिग्री कॉलेजों की बदहाली तक कई गंभीर मुद्दे उठाए हैं। प्रदर्शनकारियों का साफ तौर पर कहना है कि सरकारी संस्थानों में बुनियादी सुविधाओं की कमी से छात्रों का करियर प्रभावित हो रहा है।

आईटीआई भर्ती प्रक्रिया पर गहराया विवाद, सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग

प्रदर्शन के दौरान औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) की कार्यप्रणाली और भर्ती प्रक्रिया का मुद्दा प्रमुखता से उठा। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि आईटीआई का प्राथमिक उद्देश्य युवाओं को व्यावहारिक और तकनीकी कौशल प्रदान कर रोजगार के योग्य बनाना है। हालांकि, भर्ती प्रक्रिया में लगातार हो रहे विलंब और अस्पष्टता के कारण युवाओं में भारी निराशा व्याप्त है। युवाओं ने मांग की है कि सरकार आईटीआई संचालन और भर्तियों को लेकर स्थिति तुरंत साफ करे।

डिग्री कॉलेजों में संसाधनों की भारी कमी, लैब और स्टाफ के बिना ठप पड़ी पढ़ाई

सरकारी डिग्री कॉलेजों की स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि प्रदेश के कई उच्च शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों को न्यूनतम शैक्षणिक सुविधाएं भी नहीं मिल रही हैं। कॉलेजों में प्रायोगिक कार्य (प्रैक्टिकल) के लिए न तो सुसज्जित लैब हैं और न ही आवश्यक लैब स्टाफ उपलब्ध है।

निजीकरण के बढ़ते प्रभाव से बढ़ा संकट, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स बने एकमात्र सहारा

उच्च शिक्षा के तेजी से हो रहे निजीकरण पर सवाल उठाते हुए प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सरकारी व्यवस्था कमजोर होने का सीधा असर सामान्य और गरीब वर्ग के छात्रों पर पड़ रहा है। कॉलेजों में पर्याप्त शिक्षक और संसाधन न होने के कारण छात्र-छात्राओं को मजबूरी में यूट्यूब और अन्य ऑनलाइन सामग्री के भरोसे अपनी पढ़ाई पूरी करनी पड़ रही है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द ही इन व्यवस्थाओं में सुधार नहीं किया, तो प्रदेश स्तर पर बड़ा आंदोलन किया जाएगा।