वाशिंगटन। 2026 के अमेरिकी चुनावों से पहले 19 लॉमेकर्स के एक समूह ने मेटा के चुनावी सुरक्षा इंतजामों को अपर्याप्त बताया है। लॉमेकर्स का कहना है कि कंपनी द्वारा फैक्ट-चेकिंग में कटौती और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर बढ़ती निर्भरता से अमेरिकी मतदाताओं के सामने डीपफेक और राजनीतिक गलत जानकारी का खतरा बढ़ गया है।डेमोक्रेटिक सीनेटर केविन मुलिन ने इस समूह का नेतृत्व करते हुए मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग से जवाब मांगा है। उन्होंने पूछा है कि क्या कंपनी फेसबुक, इंस्टाग्राम, थ्रेड्स और व्हाट्सऐप पर तेजी से बदलते खतरों से निपटने के लिए तैयार है।

केविन मुलिन ने कहा, "जेनरेटिव एआई ने भरोसेमंद डीपफेक और दूसरे भ्रामक कंटेंट बनाना पहले से कहीं आसान कर दिया है। हम पहले से ही देख रहे हैं कि इन तरीकों का इस्तेमाल अमेरिका के चुनावों को प्रभावित करने के लिए हो रहा है। मेटा का मुख्यालय मेरे जिले में है। पिछले कुछ सालों में मेटा ने गलत जानकारी रोकने के लिए बनाए गए अहम सुरक्षा उपायों को वापस ले लिया है। इससे गंभीर सवाल उठते हैं कि क्या वह आज के तेजी से बदलते खतरों से निपटने के लिए तैयार है।"

लॉमेकर्स ने मेटा के अमेरिका में थर्ड-पार्टी फैक्ट-चेकिंग कार्यक्रम बंद करने के फैसले का भी जिक्र किया। इस कार्यक्रम में 90 से ज्यादा स्वतंत्र संगठन संभावित रूप से संदिग्ध कंटेंट की समीक्षा करते थे। मेटा ने इसकी जगह कम्युनिटी नोट्स लाया है, जिसमें शामिल यूजर्स पोस्ट पर संदर्भ जोड़ सकते हैं। लॉमेकर्स का कहना है कि इस बदलाव से जानकारी की जांच का बोझ उन यूजर्स पर डाल दिया गया है जिनके पास शायद समय, संसाधन या विशेषज्ञता न हो।

पत्र में लिखा गया, "हमारा मानना है कि मेटा का 2026 चुनाव चक्र के लिए अपनाया गया तरीका अपर्याप्त है। खासकर फैक्ट-चेकिंग में कटौती, रिस्क रिव्यू का ऑटोमेशन और मेटा के प्लेटफॉर्म्स पर एआई से बने कंटेंट के बढ़ने को देखते हुए।"

लॉमेकर्स ने 'एमिली हार्ट' नाम की फर्जी कंजर्वेटिव एमएजीए इन्फ्लुएंसर का उदाहरण दिया। रिपोर्ट के मुताबिक इसे भारत के एक 22 साल के मेडिकल छात्र ने एआई टूल्स से बनाया था। इस सिंथेटिक प्रोफाइल ने गर्भपात विरोधी और आप्रवासन विरोधी विचारों को बढ़ावा दिया। इसे इंस्टाग्राम की ओर से हटाने से पहले तक लाखों व्यूज और हजारों सब्सक्राइबर मिल चुके थे।

पत्र में टेक्सास और जॉर्जिया के सीनेट चुनावों में हुए डीपफेक मामलों का भी जिक्र है। इनमें टेक्सास के सीनेट उम्मीदवार जेम्स तालारिको का एक नकली, असली जैसा वीडियो विज्ञापन भी शामिल था जिसमें वह कैमरे से सीधे बात करते दिख रहे थे।

लॉमेर्कस ने जुकरबर्ग से 2020, 2024 और 2026 के लिए मेटा के अमेरिकी चुनाव-सुरक्षा कर्मचारियों और बजट की तुलना करने को कहा है। उन्होंने डीपफेक वीडियो, सिंथेटिक ऑडियो और राजनीतिक हस्तियों की नकल करने वाले अकाउंट्स को लेकर नीतियों की जानकारी भी मांगी है।

इसके अलावा सवाल पूछे गए हैं कि क्या भुगतान लेने वाले राजनीतिक इन्फ्लुएंसर को अपनी कमाई और फंडिंग बतानी होगी, और क्या राजनीतिक विज्ञापनों में एआई से बनी भ्रामक तस्वीरों या ऑडियो की पहचान जरूरी होगी। लॉमेकर्स ने राज्य और स्थानीय चुनाव अधिकारियों के लिए शिकायत चैनल, भ्रामक कंटेंट हटाने में लगने वाला समय और कम्युनिटी नोट्स की प्रभावशीलता की जानकारी भी मांगी है। जुकरबर्ग को 18 सितंबर तक जवाब देना है।