इंदौर। मिनी मुंबई कहे जाने वाले इंदौर शहर में इस समय भीषण जल संकट आम जनता की सबसे बड़ी मुसीबत बन गया है। गर्मी के तीखे तेवरों के साथ ही शहर के कई इलाकों में पानी की किल्लत विकराल रूप ले चुकी है। हालत यह है कि कई पॉश और रिहायशी कॉलोनियों में पानी की सप्लाई बेहद कम कर दी गई है, तो वहीं अनेक क्षेत्रों में लोगों को चार-चार दिनों तक नर्मदा के पानी का इंतजार करना पड़ रहा है। पानी न मिलने से गुस्साए नागरिकों का सब्र अब पूरी तरह टूट चुका है और जनता का यह आक्रोश सड़कों पर हंगामे, चक्काजाम और प्रदर्शन के रूप में फूट पड़ा है। स्थिति को संभालने के लिए पुलिस और नगर निगम के आला अधिकारियों को लगातार मोर्चा संभालना पड़ रहा है।
गौरी नगर और विकास नगर में चक्काजाम, टंकियां आधी भरने का आरोप
जल संकट को लेकर सबसे बड़ा बवाल गौरी नगर और विकास नगर में देखने को मिला। गौरी नगर में पानी की भारी किल्लत से परेशान सैकड़ों रहवासी कांग्रेस पार्षद यशस्वी पटेल और राजू भदौरिया के नेतृत्व में सड़कों पर उतर आए और चौराहे पर धरना देकर करीब दो घंटे तक चक्काजाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि नगर निगम जल वितरण में भेदभाव कर रहा है और गरीब बस्तियों को पर्याप्त पानी नहीं दिया जा रहा। पार्षद राजू भदौरिया ने सीधे तौर पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि वीणा नगर स्थित पानी की टंकी को पहले पाँच मीटर तक भरा जाता था, लेकिन पिछले एक महीने से अधिकारियों की मिलीभगत के चलते इसे महज तीन या साढ़े तीन मीटर ही भरा जा रहा है। इसका सीधा असर वार्ड 20, 21 और 22 की जल सप्लाई पर पड़ रहा है, जिससे हजारों परिवारों के सामने पीने के पानी का संकट खड़ा हो गया है। इसी तरह विकास नगर में भी महिलाओं और पुरुषों ने सड़क पर बैठकर लंबा जाम लगाया।
22 जोन कार्यालयों पर फूटे मटके, गुस्से में तोड़ा हाइड्रेंट
जल संकट के खिलाफ विपक्ष और जनता ने बेहद आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों ने नगर निगम के सभी 22 जोन कार्यालयों पर एक साथ विरोध प्रदर्शन करते हुए खाली मटके फोड़े और जमकर नारेबाजी की। वहीं, तपेश्वरी बाग में आक्रोशित लोगों ने पानी की टंकी के पास प्रदर्शन के दौरान गुस्से में आकर हाइड्रेंट तक तोड़ डाला। स्थिति इतनी तनावपूर्ण है कि शहर के कई क्षेत्रों में नागरिकों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और विधायकों के घरों का घेराव करने की खुलेआम चेतावनी दे दी है।
एक तरफ पानी को तरसती जनता, दूसरी तरफ नौलखा चौराहे पर भारी बर्बादी
चौंकाने वाली बात यह है कि जहाँ पूरा शहर पानी की एक-एक बूंद के लिए त्राहि-त्राहि कर रहा है, वहीं नौलखा चौराहे पर नर्मदा की मुख्य पाइपलाइन में पिछले कई दिनों से बड़ा लीकेज हो रहा है, जिससे प्रतिदिन हजारों-लाखों लीटर शुद्ध पानी सड़कों पर बहकर बर्बाद हो रहा है। नगर निगम के तकनीकी अधिकारियों का कहना है कि इस लीकेज को सुधारने के लिए कम से कम 24 घंटे का बड़ा 'शटडाउन' लेना होगा। यदि यह शटडाउन लिया जाता है, तो नौलखा से हीरानगर तक जुड़े शहर के करीब 34 प्रमुख जल गृहों (टंकियों) की सप्लाई पूरी तरह ठप हो जाएगी, जिससे संकट और अधिक गहरा सकता है।
कमिश्नर ने खुद पकड़ा पानी बेचने वाला अवैध टैंकर, बिना स्टीकर वाले टैंकर जब्त
शहर में जल संकट के बीच पानी माफिया भी सक्रिय हो गए हैं, जो बिना नंबर और बिना निगम के स्टीकर वाले अवैध टैंकरों से मनमाने दामों पर पानी बेच रहे हैं। गुरुवार को खुद निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल ने रानी सती गेट इलाके में औचक निरीक्षण के दौरान एक संदिग्ध टैंकर को रोककर जांच की। जांच में सामने आया कि टैंकर पर निगम का कोई स्टीकर नहीं था और वे रहवासियों से पानी के बदले अवैध रूप से पैसे वसूल रहे थे। कमिश्नर के निर्देश पर टैंकर को तुरंत जब्त कर भारी जुर्माना लगाया गया। इसके अलावा लसूडिया मोरी क्षेत्र से भी बिना पहचान वाले दो अवैध टैंकरों को पकड़कर पेनाल्टी लगाई गई है।
महापौर और कमिश्नर पहुंचे कंट्रोल रूम, मुफ्त टैंकर सप्लाई का दावा
हालात की गंभीरता को देखते हुए महापौर पुष्यमित्र भार्गव और निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने खुद बिजलपुर स्थित मुख्य कंट्रोल रूम पहुंचकर स्थिति की समीक्षा की और अधिकारियों को पानी से जुड़ी हर शिकायत का तुरंत निवारण करने के कड़े निर्देश दिए। नगर निगम का दावा है कि भूजल स्तर (Ground Water Level) अत्यधिक नीचे जाने और शहर के अधिकांश बोरिंग सूखने के कारण यह स्थिति बनी है। निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रभावित इलाकों में नर्मदा जल के साथ-साथ 645 किराए के और निगम के टैंकरों के माध्यम से पूरी तरह मुफ्त (निशुल्क) पानी की सप्लाई की जा रही है। अधिकारियों ने आम जनता से अपील की है कि यदि कोई भी टैंकर चालक या कर्मचारी पानी के बदले पैसों की मांग करता है, तो तुरंत इसकी शिकायत निगम के कंट्रोल रूम, हेल्पलाइन नंबर या '311 ऐप' पर दर्ज कराएं, ताकि दोषी के खिलाफ तत्काल दंडात्मक कार्रवाई की जा सके।




