छिंदवाड़ा। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत आने वाले शैक्षणिक संस्थानों और कार्यालयों में कर्मचारियों की पदस्थापना व अटैचमेंट व्यवस्था पर बड़े सवाल उठने लगे हैं। ताजा मामला बिछुआ विकासखंड के संकुल केंद्र धनेगांव के अंतर्गत आने वाले शासकीय माध्यमिक विद्यालय मुंगनापार का है। यहां भृत्य (पीन) पद पर नियुक्त एक कर्मचारी पर विगत करीब दो दशक (वर्ष 2006) से दूसरी संस्था में लिपिकीय (बाबू) का कार्य करने का आरोप लगा है।
भृत्य पद पर नियुक्ति, पर दो दशक से कर रहे 'बाबूगिरी'
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ज्ञानचंद बुनकर की मूल पदस्थापना शासकीय माध्यमिक विद्यालय मुंगनापार में भृत्य (चपरासी) के पद पर है। आरोप है कि वे अपनी मूल संस्था में सेवाएं देने के स्थान पर वर्ष 2006 से शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय धनेगांव में बाबू का काम देख रहे हैं। 18-20 वर्षों से जारी इस व्यवस्था को लेकर अब यह सवाल खड़ा हो रहा है कि किस सक्षम अधिकारी के आदेश या नियम के तहत किसी भृत्य को इतने लंबे समय तक लिपिकीय कार्य सौंपा गया।
विभागीय निगरानी तंत्र पर उठे सवाल
यदि यह व्यवस्था पिछले दो दशकों से निरंतर चल रही है, तो विभाग के जिला और विकासखंड स्तरीय वरिष्ठ अधिकारियों की नजर इस ओर न पड़ना आश्चर्यजनक है। स्थानीय लोगों और विभागीय सूत्रों का कहना है कि यदि अधिकारियों को इसकी पूर्व जानकारी थी, तो कर्मचारी को उसकी मूल पदस्थापना पर वापस भेजने या नियमित लिपिक की व्यवस्था करने के लिए कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया गया।
जिला मुख्यालय से लेकर अन्य कार्यालयों तक यही हाल!
चर्चा है कि यह अनियमितता केवल धनेगांव या मुंगनापार तक ही सीमित नहीं है। जनजातीय कार्य विभाग के जिला मुख्यालय कार्यालय सहित जिले के अन्य कई शैक्षणिक संस्थानों और दफ्तरों में भी भृत्य पद पर नियुक्त कर्मचारियों से लिपिकीय कार्य कराया जा रहा है। सवाल यह उठ रहा है कि जब विभाग में नियमित क्लर्क/बाबू पदस्थ हैं, तो भृत्यों को उनके मूल दायित्वों से अलग कर बाबूगिरी क्यों कराई जा रही है।
जिले के प्रबुद्ध जनों और कर्मचारी यूनियनों ने मांग की है कि जिले भर के शैक्षणिक संस्थानों और शासकीय कार्यालयों में वर्षों से चल रहे ऐसे सभी नियमविरुद्ध अटैचमेंट और कार्य-विभाजन की निष्पक्ष जांच कराई जाए। जांच के जरिए यह स्पष्ट किया जाए कि कितने भृत्य बाबू का काम कर रहे हैं और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।




