भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने केन-मंदाकिनी लिंक अंतर्राज्यीय सिंचाई परियोजना का प्रस्ताव तैयार कर भारत सरकार को भेज दिया है। 8400 करोड़ रुपए से अधिक की अनुमानित लागत वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना से 93 हजार 310 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता का विकास होगा, साथ ही इससे 15.8 मेगावाट विद्युत उत्पादन भी किया जा सकेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय में आयोजित जल संसाधन और नर्मदा घाटी विकास विभागों की संयुक्त समीक्षा बैठक में यह महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। बैठक में मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि आगामी 6 माह में लगभग 6 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं में वृद्धि करने वाली इन सभी निर्माणाधीन परियोजनाओं का लोकार्पण सुनिश्चित किया जाए।


बैठक के दौरान आगामी सिंहस्थ से जुड़ी महत्वपूर्ण परियोजनाओं के कार्यों की प्रगति की भी गहन समीक्षा की गई। जिम्मेदार अधिकारियों ने बताया कि सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना का 82 प्रतिशत कार्य पूरी तरह से पूर्ण हो गया है। इसके साथ ही कान्ह डायवर्शन क्लोज्ड डक्ट परियोजना में भी अब तक 66 प्रतिशत प्रगति हासिल की जा चुकी है, जबकि क्षिप्रा नदी के तट पर 29 किलोमीटर की लंबाई में बनाए जा रहे भव्य घाटों का निर्माण कार्य भी 60 प्रतिशत तक पूरा कर लिया गया है।


इस उच्च स्तरीय बैठक में केन-बेतवा अंतर्राज्यीय नदी जोड़ो परियोजना को लेकर भी अहम प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। परियोजना के तहत भू-अर्जन, पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन के लिए विशेष पैकेज के अंतर्गत अवार्ड पारित कर प्रभावितों को 90 प्रतिशत तक का भुगतान किया जा चुका है। इसके अलावा बीना कॉम्प्लेक्स बहुउद्देशीय परियोजना में चकरपुर एवं मड़िया बांध का निर्माण कार्य भी सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। सिंचाई के दायरे को बढ़ाने वाली संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल अंतर्राज्यीय नदी जोड़ो परियोजना से प्रदेश के 13 जिलों के 6.16 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई की सीधी सुविधा मिलेगी। अधिकारियों ने यह भी अवगत कराया कि वर्ष 2022 में क्षतिग्रस्त हुए कारम बांध के पुनर्निर्माण के कार्य अब लगभग पूर्ण हो चुके हैं।