भिंड, अक्षय जोशी। जिले के रौन थाना क्षेत्र के गौरई मोड़ पर बुधवार सुबह उस समय बड़ा हादसा टल गया, जब स्कूली बच्चों से भरी बस की सीमेंट से लदे ट्राले से टक्कर हो गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बस में सवार बच्चों में चीख-पुकार मच गई। हादसे में 7 बच्चे घायल हुए हैं। सभी बच्चों को उपचार के लिए रौन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी हालत सामान्य बताई गई है।
जानकारी के अनुसार, अमर ज्योति पब्लिक स्कूल की बस सुबह बच्चों को लेकर नेशनल हाईवे-552 से गुजर रही थी। बस गौरई कस्बे के पास पहुंची ही थी, तभी सीमेंट से भरे ट्राले से उसकी टक्कर हो गई। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। आसपास मौजूद ग्रामीण तत्काल घटनास्थल पर पहुंचे और बच्चों को बस से बाहर निकालने में मदद की। इसके बाद पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी गई।
सूचना मिलते ही 108 एंबुलेंस, पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और घायल बच्चों को रौन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। घायलों में 12 वर्षीय अल्पेश राजावत, 11 वर्षीय ऋषभ राजावत, 6 वर्षीय सार्थक राजावत, 8 वर्षीय अप्रांश, 7 वर्षीय प्रद्युम्न, 6 वर्षीय देव राजावत और 12 वर्षीय कीर्ति राजावत शामिल हैं।
अस्पताल में डॉक्टरों ने सभी बच्चों की जांच कर प्राथमिक उपचार किया। राहत की बात यह रही कि किसी भी बच्चे को गंभीर चोट नहीं आई और सभी की हालत सामान्य बताई गई है। हादसे की जानकारी मिलते ही बच्चों के परिजन भी अस्पताल पहुंच गए, जिससे कुछ देर के लिए अस्पताल परिसर में भी अफरा-तफरी का माहौल रहा।
हादसे की सूचना पर रौन थाना पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है। हादसे के कारणों की भी जांच की जा रही है।
इस दुर्घटना ने एक बार फिर स्कूल बसों की सुरक्षा और रफ्तार की निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्कूल बसों में स्पीड गवर्नर, पैनिक बटन, इमरजेंसी गेट, अग्निशमन यंत्र और प्रशिक्षित चालक जैसे सुरक्षा इंतजाम अनिवार्य हैं। ऐसे में हादसे के बाद स्कूल बस के सुरक्षा मानकों और फिटनेस की जांच की जरूरत सामने आई है।
सवाल यह भी है कि जिले में संचालित स्कूल बसों की फिटनेस, चालकों के प्रशिक्षण और निर्धारित गति सीमा की नियमित निगरानी हो रही है या नहीं। रौन का यह हादसा एक चेतावनी है कि प्रशासन को जिलेभर की स्कूल बसों की सघन जांच कर सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना चाहिए, ताकि मासूम बच्चों की जिंदगी खतरे में न पड़े।




