नर्मदापुरम। नर्मदापुरम जिले के सोहागपुर विकासखंड में खरपतवारनाशक दवा के इस्तेमाल से धान की फसलों को भारी नुकसान पहुंचने का गंभीर मामला सामने आया है। क्षेत्र के जिले के सोहागपुर विकासखंड में खरपतवारनाशक दवा के इस्तेमाल से धान की फसलों को भारी नुकसान पहुंचने का गंभीर मामला सामने आया है। क्षेत्र के किसानों का आरोप है कि खेतों में खरपतवार नष्ट करने के लिए छिड़की गई 'विल सुपर' (फेनॉक्साप्रॉप-पी-इथाइल 9.3% ईसी) दवा के कारण खरपतवार के साथ-साथ धान के पौधे भी तेजी से झुलसने और सूखने लगे हैं। फसल की यह स्थिति देख किसानों के होश उड़ गए और उन्होंने कृषि विभाग से न्याय की गुहार लगाई। मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला कृषि प्रशासन ने पूरे नर्मदापुरम जिले में 'विल सुपर' की बिक्री और वितरण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।


दर्जनों किसानों ने की लिखित शिकायत, 1,500 एकड़ फसल प्रभावित होने का अनुमान

सोहागपुर के वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी सुनील कुमार बर्डे के अनुसार, पालदेवरी के किसान नारायण सिंह, भागीरथ पटेल, रईस पटेल, पथरई के गोपीलाल और भौंखेड़ी कला के हनुमत कुशवाहा सहित करीब एक दर्जन किसानों ने फसल बर्बादी की लिखित शिकायत दर्ज कराई है। किसानों ने सोहागपुर स्थित अधिकृत विक्रेता मेसर्स कृपाल दास राधामल और विंध्यवासिनी ट्रेडर्स से विलबुड कंपनी की यह दवा खरीदी थी।


आंकड़ों के मुताबिक, इन दोनों फर्मों से लगभग 160 लीटर (कृपाल दास राधामल से 130 लीटर और विंध्यवासिनी ट्रेडर्स से 30 लीटर) दवा की बिक्री हुई है। सामान्य मानक के अनुसार, एक एकड़ में लगभग 100 मिलीलीटर दवा का उपयोग होता है, यानी एक लीटर से करीब 10 एकड़ रकबा कवर होता है। बेची गई मात्रा के आधार पर आशंका जताई जा रही है कि क्षेत्र के 1,000 से 1,500 एकड़ में लगी धान की फसल इस जहरीले असर की चपेट में आ सकती है। वास्तविक नुकसान का निर्धारण विस्तृत राजस्व व कृषि सर्वे के बाद ही होगा।


कृषि वैज्ञानिकों और अफसरों के संयुक्त दल ने गांवों में किया सर्वे

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कृषि विभाग के उच्चस्तरीय दल ने प्रभावित ग्रामीण अंचलों का सघन दौरा किया। इस जांच टीम में पवारखेड़ा आंचलिक कृषि अनुसंधान केंद्र के पौधा रोग विशेषज्ञ डॉ. के.के. मिश्रा, सहायक संचालक कृषि शैलेंद्र राठौर, इंसेक्टिसाइड फर्टिलाइजर इंस्पेक्टर और वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी शामिल रहे। दल ने पालदेवरी, गूजरखेड़ी, भौंखेड़ी, कलमेशरा और चीचली सहित कई गांवों के खेतों में पहुंचकर भौतिक सत्यापन किया। प्रारंभिक सर्वे में विशेषज्ञों ने पाया कि विल सुपर दवा के छिड़काव के बाद धान के पौधों पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।


भोपाल और फरीदाबाद प्रयोगशालाओं में भेजे गए सैंपल, कंपनी को नोटिस जारी

कृषि विभाग के कीटनाशक निरीक्षकों ने संबंधित दोनों दुकानों के स्टॉक से दवा के सीलबंद नमूने जब्त किए हैं। इन सैंपलों को रासायनिक गुणवत्ता और मानक जांच के लिए भोपाल और फरीदाबाद (हरियाणा) स्थित केंद्रीय कीटनाशी परीक्षण प्रयोगशाला सहित तीन अलग-अलग लैबों में भेजा गया है। अधिकारियों के अनुसार अगले 2 से 3 सप्ताह में प्रयोगशाला की आधिकारिक जांच रिपोर्ट प्राप्त हो जाएगी।


आर.के. सिंह (उप संचालक कृषि, नर्मदापुरम)

"किसानों के हितों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए पूरे जिले में 'विल सुपर' दवा के क्रय-विक्रय पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। संबंधित निर्माता कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है। दवा के नमूनों को परीक्षण के लिए उच्चस्तरीय प्रयोगशालाओं में भेजा गया है। लैब से रिपोर्ट प्राप्त होते ही नियमानुसार कंपनी और विक्रेताओं के विरुद्ध कठोर दंडात्मक व वैधानिक कार्यवाही की जाएगी।"


प्रभावित किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि जांच रिपोर्ट के इंतजार के साथ-साथ खराब हुई फसलों का तत्काल संयुक्त सर्वे कराकर उन्हें उचित मुआवजा दिलाया जाए और गुणवत्ताविहीन रसायन बेचने वाली कंपनी व डीलरों के लाइसेंस निरस्त कर उन पर कानूनी मुकदमा दर्ज किया जाए।