नई दिल्ली। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत में कारोबारी विश्वास मजबूत बना हुआ है। उद्योग संगठन एसोचैम द्वारा मंगलवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर 2026 में एसोचैम बिजनेस कॉन्फिडेंस इंडेक्स (एबीसी इंडेक्स) 8.12 प्रतिशत बढ़कर 128.72 पर पहुंच गया, जबकि अक्टूबर 2025 में यह 119.05 था।एसोचैम ने कहा कि कारोबारी विश्वास में यह वृद्धि मजबूत जीएसटी संग्रह, बैंक ऋण में तेज बढ़ोतरी, यात्री वाहन बिक्री में मजबूती, पीएमआई के विस्तार और आर्थिक सुधारों को लेकर उद्योग जगत की सकारात्मक प्रतिक्रिया के कारण दर्ज की गई है।
अक्टूबर 2026 में सकल जीएसटी संग्रह 22.9 प्रतिशत बढ़कर 2.31 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया। उद्योग संगठन के अनुसार, यह त्योहारी सीजन के दौरान मजबूत उपभोग, आर्थिक गतिविधियों में तेजी और बेहतर कर अनुपालन को दर्शाता है।
इसके अलावा, सितंबर 2026 में बैंक ऋण वृद्धि (क्रेडिट ग्रोथ) 19.9 प्रतिशत रही, जो उद्योग, एमएसएमई और खुदरा क्षेत्र में मजबूत ऋण मांग का संकेत देती है। यात्री वाहनों की मजबूत बिक्री से उपभोक्ता मांग में मजबूती झलकती है, जबकि 56.7 का कंपोजिट पीएमआई निजी क्षेत्र की गतिविधियों में लगातार विस्तार को दर्शाता है।
एसोचैम के अनुसार, ये सभी संकेतक घरेलू मांग की मजबूती, कारोबारी माहौल में सुधार और अर्थव्यवस्था की निरंतर गति को दर्शाते हैं, जिससे भारत के आर्थिक परिदृश्य को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण मजबूत हुआ है।
उद्योग संगठन ने नवंबर 2026 के लिए भी सकारात्मक अनुमान व्यक्त किया है। एसोचैम का अनुमान है कि नवंबर 2026 में एबीसी इंडेक्स 128.4 पर रहेगा, जो नवंबर 2025 के 118.56 के मुकाबले 8.3 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है।
गौरतलब है कि एसोचैम बिजनेस कॉन्फिडेंस इंडेक्स को 30 सितंबर 2026 को लॉन्च किया गया था, जो भारतीय अर्थव्यवस्था की समग्र स्थिति का आकलन करने के लिए 22 प्रमुख आर्थिक संकेतकों का विश्लेषण करता है।
एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल कुमार मिंडा ने कहा कि नवीनतम सूचकांक के आंकड़े भारत के मजबूत कारोबारी वातावरण और आर्थिक वृद्धि को दर्शाते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि चालू वित्त वर्ष में भी भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत जीडीपी वृद्धि दर बनाए रखेगी।
वहीं एसोचैम के महासचिव सौरभ सान्याल ने कहा कि नवंबर के लिए 8.3 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान कारोबारी विश्वास में सुधार का संकेत देता है और इससे भविष्य की आर्थिक गतिविधियों की दिशा का भी अंदाजा मिलता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार के सुधारवादी कदमों ने भी उद्योग जगत का भरोसा बढ़ाया है। जीएसटी से जुड़े अपराधीकरण प्रावधानों में ढील, सामान्य दंड को 25,000 रुपए से घटाकर 10,000 रुपए करना, अभियोजन सीमा को 1 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपए करना तथा निरीक्षण प्रक्रियाओं को सरल बनाना जैसे कदम भरोसा-आधारित अनुपालन व्यवस्था को बढ़ावा दे रहे हैं।
इसके अलावा, जन विश्वास अधिनियम के तहत छोटे-मोटे अपराधों के गैर-अपराधीकरण से अनुपालन बोझ कम हुआ है। वहीं एमएसएमईडी (संशोधन) अधिनियम, 2026 के जरिए एमएसएमई की श्रेणियों को सरल बनाया गया है, वित्त तक पहुंच को आसान किया गया है और समय पर भुगतान संबंधी प्रावधानों को मजबूत किया गया है, जिससे कारोबार सुगमता को बढ़ावा मिला है।
















