छतरपुर, विनोद मिश्रा। जिला अस्पताल में डिलीवरी के बाद एक प्रसूता और उसके नवजात बच्चे की मौत का मामला सामने आया है। घटना ने एक बार फिर जिला अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं और प्रसूता को समय पर उपचार एवं रक्त उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।


जानकारी के अनुसार ग्राम सिंगरोन निवासी संध्या आदिवासी शनिवार को प्रसव के लिए बमीठा अस्पताल पहुंची थीं। वहां से उन्हें बेहतर उपचार के लिए छतरपुर जिला अस्पताल रेफर किया गया। जिला अस्पताल के लेबर रूम में महिला की डिलीवरी हुई, लेकिन प्रसव के बाद प्रसूता और उसके नवजात बच्चे दोनों की मौत हो गई।


बताया जा रहा है कि सामान्य डिलीवरी से पहले ही नवजात की मौत हो चुकी थी। वहीं सीएमएचओ के अनुसार महिला की डिलीवरी सामान्य रूप से हुई थी और प्रसव के बाद करीब दो घंटे तक उसकी हालत ठीक रही। इसके बाद अचानक महिला को घबराहट होने लगी और उसकी तबीयत बिगड़ गई।


सीएमएचओ के मुताबिक महिला में ब्लड की कमी हो गई थी और समय पर रक्त की व्यवस्था नहीं हो सकी। इसी दौरान उसकी हालत गंभीर हुई और उसकी मौत हो गई।


समय पर ब्लड क्यों नहीं मिल सका?

इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल जिला अस्पताल की ब्लड व्यवस्था को लेकर खड़ा हो रहा है। यदि प्रसव के बाद करीब दो घंटे तक महिला की हालत सामान्य थी, तो अचानक उसकी तबीयत बिगड़ने के बाद अस्पताल में तत्काल रक्त की व्यवस्था क्यों नहीं हो सकी? क्या महिला की स्थिति बिगड़ने से पहले ही संभावित खतरे को पहचान लिया गया था? और यदि समय रहते पर्याप्त रक्त एवं बेहतर उपचार उपलब्ध हो जाता, तो क्या महिला की जान बचाई जा सकती थी—यह जांच का विषय है।

बिना पोस्टमार्टम शव सौंपे जाने पर भी सवाल

मामले में एक और महत्वपूर्ण बात सामने आई है। प्रसूता और नवजात के शव को पोस्टमार्टम के बिना ही परिजनों को सौंप दिया गया। सीएमएचओ का कहना है कि परिजनों ने लिखित रूप से तथा वीडियोग्राफी के दौरान पोस्टमार्टम नहीं कराने की सहमति दी थी, जिसके बाद शव उन्हें सौंप दिए गए।


हालांकि, मां और नवजात की अस्पताल में मौत तथा महिला की अचानक बिगड़ी तबीयत के बीच मौत के कारणों को लेकर सवाल बने हुए हैं। ऐसे में यह भी सवाल उठ रहा है कि पोस्टमार्टम नहीं होने की स्थिति में मौत की वास्तविक वजह की चिकित्सकीय पुष्टि किस तरह होगी।

जांच से सामने आ सकती है इलाज की पूरी तस्वीर

अब स्वास्थ्य विभाग के सामने कई सवाल हैं। महिला को बमीठा अस्पताल से जिला अस्पताल रेफर किए जाने के बाद उसकी पूरी मेडिकल हिस्ट्री क्या थी? जिला अस्पताल पहुंचने के बाद उसकी निगरानी और उपचार किस तरह किया गया? प्रसव के बाद अचानक हालत बिगड़ने पर कौन-कौन से उपचार किए गए? अस्पताल में उस समय रक्त की उपलब्धता कितनी थी और रक्त की व्यवस्था में देरी क्यों हुई?


इन सभी बिंदुओं की निष्पक्ष जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि महिला की मौत किन परिस्थितियों में हुई और कहीं इलाज अथवा व्यवस्थाओं में कोई चूक तो नहीं हुई।


सरकारी अस्पताल गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए इलाज का सबसे बड़ा सहारा होते हैं। ऐसे में जिला अस्पताल में प्रसूता और नवजात की मौत होना गंभीर मामला है। अब लोगों की नजर स्वास्थ्य विभाग की जांच पर है कि मामले की वास्तविक परिस्थितियों की जांच कर जिम्मेदारी तय की जाती है या इसे महज एक सामान्य मृत्यु मानकर मामला खत्म कर दिया जाता है।