छतरपुर, संजय अवस्थी: असत्य पर सत्य, अधर्म पर धर्म, अन्याय पर न्याय और अनीति पर नीति के विजय पर्व दशहरे के उपलक्ष्य में छतरपुर नगर के जानराय टौरिया मंदिर में विभिन्न मंदिरों के संत, पुजारी, कर्मकांडी विप्र, कथावाचक और ज्योतिषियों की एक विशेष बैठक एवं दशहरा मिलन समारोह का आयोजन किया गया। इस दौरान सभी ने एक-दूसरे को तिलक लगाकर विजय दशमी की शुभकामनाएं दीं और सामूहिक भोजन प्रसादी ग्रहण की।
समारोह के दौरान सर्वसम्मति से नई कार्यकारिणी का गठन किया गया, जिसमें शहर के जाने-माने कथावाचक आचार्य पं. सौरभ तिवारी को 'वैदिक विद्वान संघ' का अध्यक्ष चुना गया। इसके साथ ही आचार्य राजकुमार अवस्थी को उपाध्यक्ष, आचार्य विजय कृष्ण व्यास को महासचिव और आनंद चतुर्वेदी शास्त्री को सह-सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। संगठन के मार्गदर्शन के लिए जानराय टौरिया के महंत भगवानदास श्रृंगारी, अनगढ़ टौरिया के महंत महावीर दास, पीतांबरा शक्तिपीठ के पुजारी पं. बृजेश शर्मा, हरीश मिश्रा और आचार्य ओमप्रकाश शर्मा को संरक्षक मंडल में सर्वसम्मति से शामिल किया गया। आयोजकों ने बताया कि आगामी समय में संगठनात्मक दृष्टिकोण से संरक्षक मंडल और कार्यकारिणी का और अधिक विस्तार किया जाएगा।
बैठक में सनातन धर्म के उत्थान और सामाजिक कार्यों के लिए कई महत्वपूर्ण रूपरेखाएं तैयार की गईं। भविष्य में छतरपुर शहर में सामूहिक यज्ञोपवीत संस्कार का भव्य आयोजन किए जाने का निर्णय लिया गया। इसके साथ ही, मंदिरों और कर्मकांडी विद्वानों की एक बृहद सूची तैयार करने की योजना बनाई गई ताकि संगठन के माध्यम से सनातन धर्म की रक्षा और प्रचार-प्रसार के लिए विभिन्न धार्मिक व सामाजिक कार्य सुचारू रूप से किए जा सकें।
इस गरिमामयी आयोजन में विनोद पाठक, दीपक कृष्ण शास्त्री, प्रेमनारायण द्विवेदी, अमलेश चौबे, नरेन्द्र दुबे, अशोक विंदुआ, प्रेमचंद्र द्विवेदी, कौशलेंद्र दास, हनुमान दास, सुदामा महाराज, मोनू पौराणिक, हरगोविंद तिवारी, श्रीराम मिश्रा, कृष्ण चंद्र मिश्रा (राहुल), सुनील कृष्ण शास्त्री, देवेंद्र मिश्रा, दीपक मिश्रा, धीरेंद्र शास्त्री, जीतेंद्र चौबे, राममिलन शर्मा, पुरुषोत्तम तिवारी, नीरज पांडेय, अशोक रिछारिया, बबलेश तिवारी, विष्णु शंकर चौबे, शिवम मिश्रा, गणेश गोस्वामी, शिवम तिवारी, मन्नीलाल पटैरिया, आशीष अरजरिया, आदित्य मिश्रा, दयाशंकर चतुर्वेदी, आशीष तिवारी, राजेश मिश्रा, राकेश रिछारिया, अनुजय पाठक, वीरेंद्र तिवारी, नीतेश तिवारी, जेपी शुक्ला, राजेन्द्र त्रिवेदी, संतोष गंगेले, जयराम चतुर्वेदी, प्रमोद डेंगा, आकाश दुबे, हर्ष मिश्रा, रामकिशोर दास, विष्णु दत्त मिश्रा और स्वामी प्रसाद अरजरिया सहित बड़ी संख्या में संत, पुजारी, कथावाचक और कर्मकांडी विद्वान उपस्थित रहे।
















