मुंबई। एस्सार रिन्यूएबल्स लिमिटेड (ईआरएल), जो एस्सार पावर की अक्षय ऊर्जा या नवीकरणीय ऊर्जा (रिन्यूएबल एनर्जी) इकाई है, ने एनएचपीसी लिमिटेड के साथ आंध्र प्रदेश में 300 मेगावाट की फर्म एंड डिस्पैचेबल रिन्यूएबल एनर्जी (एफडीआरई) परियोजना के लिए पावर परचेज एग्रीमेंट (पीपीए) पर हस्ताक्षर किए हैं।इस परियोजना में एस्सार पावर करीब 4,500 करोड़ रुपए का निवेश करेगी। परियोजना के तहत सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (बीईएसएस) को एकीकृत किया जाएगा, ताकि विश्वसनीय और मांग के अनुसार उपलब्ध कराई जा सकने वाली हरित बिजली का उत्पादन हो सके।
यह परियोजना एस्सार पावर की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत कंपनी लगभग 5 गीगावाट का विविधीकृत ऊर्जा पोर्टफोलियो विकसित कर रही है। इस पोर्टफोलियो में अक्षय ऊर्जा के साथ-साथ तापीय और गैस आधारित बिजली उत्पादन परिसंपत्तियां भी शामिल होंगी।
इस अवसर पर एस्सार ग्रुप के ऑपरेटिंग पार्टनर-इन्फ्रास्ट्रक्चर श्रीनिवासन वैद्यनाथन ने कहा कि 'विकसित भारत' के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ते हुए देश के लिए एक विश्वसनीय और टिकाऊ ऊर्जा तंत्र का निर्माण बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में एस्सार के लंबे अनुभव और नई तकनीकों पर फोकस के कारण समूह भारत की अगली ऊर्जा विकास यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की स्थिति में है।
वहीं एस्सार पावर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अंकुर कुमार ने कहा कि कंपनी सौर, पवन और बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों में मजबूत पोर्टफोलियो तैयार करने पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि एनएचपीसी के साथ 300 मेगावाट की यह परियोजना कंपनी की अक्षय ऊर्जा रणनीति में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और इससे उसके नवीकरणीय ऊर्जा कारोबार को नई मजबूती मिलेगी।
एनएचपीसी लिमिटेड, जो विद्युत मंत्रालय के अधीन भारत सरकार का नवरत्न उपक्रम है, देश की सबसे बड़ी जलविद्युत विकास कंपनी मानी जाती है। हाल के वर्षों में एनएचपीसी ने अपने कारोबार का विस्तार सौर और पवन ऊर्जा क्षेत्रों में भी किया है और अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में अपनी उपस्थिति लगातार मजबूत कर रही है।
एस्सार पावर ने कहा कि उसकी ऊर्जा रणनीति भारत के बदलते ऊर्जा परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है, जिसमें स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश के साथ-साथ पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों के माध्यम से विश्वसनीय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
कंपनी का कहना है कि भारत के शहरी और औद्योगिक केंद्रों में बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में एकीकृत ऊर्जा पोर्टफोलियो के माध्यम से ऊर्जा सुरक्षा, ग्रिड की विश्वसनीयता और कम-कार्बन भविष्य की दिशा में देश के संक्रमण को समर्थन देना आवश्यक है।
यह परियोजना भारत के 2030 तक 500 गीगावाट अक्षय ऊर्जा क्षमता हासिल करने के राष्ट्रीय लक्ष्य को भी समर्थन प्रदान करेगी और हरित ऊर्जा क्षेत्र में निजी निवेश को और गति दे सकती है।

















