भोपाल। राजधानी भोपाल में मंगलवार को एक अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिला, जब किसी शैक्षणिक संस्थान के स्वरूप और पहचान को बचाने के लिए 21वीं सदी की नई पीढ़ी यानी 'जेन अल्फा' के छात्र-छात्राएं खुद सड़क पर उतर आए। रीजनल स्कूल (डेमोंस्ट्रेशन मल्टीपर्पज स्कूल - DMS) के करीब 300 से 400 स्कूली बच्चों ने संस्थान को केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) में मर्ज किए जाने के प्रस्ताव के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। हाथों में 'सेव डीएमएस' और 'वी वांट जस्टिस' की तख्तियां लिए नन्हें विद्यार्थियों ने संस्थान के प्राचार्य प्रोफेसर एसके गुप्ता को ज्ञापन सौंपकर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई।
शिक्षा की प्रयोगशाला है डीएमएस, मूल पहचान खत्म करने का आरोप
मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता विवेक त्रिपाठी ने इस प्रदर्शन को राजधानी का पहला औपचारिक 'जेन अल्फा प्रोटेस्ट' बताया। उन्होंने कहा कि एनसीईआरटी के अंतर्गत दिसंबर 1965 से देशभर में शिक्षा के नए प्रयोगों और नवाचार के लिए चार प्रमुख शैक्षणिक प्रयोगशालाएं भोपाल, अजमेर, मैसूर और भुवनेश्वर में स्थापित की गई थीं। यहां होने वाले नवाचारों और प्रयोगों के आधार पर ही पूरे देश की स्कूली शिक्षा नीति में सुधार किए जाते रहे हैं। छात्रों और शिक्षकों का तर्क है कि इसे केंद्रीय विद्यालय संगठन में शामिल करने से इसकी ऐतिहासिक प्रयोगात्मक पहचान पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।
प्रवेश नीति और वोकेशनल पाठ्यक्रमों को लेकर अभिभावकों में गहरी चिंता
प्रदर्शन में शामिल विद्यार्थियों के अभिभावकों ने संविलयन की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अभिभावकों का कहना है कि संस्थान में नर्सरी से 12वीं तक करीब 1000 छात्र अध्ययनरत हैं, जहां सामान्य विषयों के अलावा विशेष व्यावसायिक (वोकेशनल) पाठ्यक्रम भी पढ़ाए जाते हैं। केंद्रीय विद्यालय की प्रवेश नीति और प्राथमिकताएं पूरी तरह अलग हैं। ऐसे में यदि यह स्कूल केवीएस में मर्ज होता है, तो मौजूदा विद्यार्थियों के भविष्य, वोकेशनल कोर्सेज और भविष्य में सामान्य परिवारों के बच्चों के दाखिले को लेकर भारी अनिश्चितता पैदा हो जाएगी।
मांगें पूरी न होने पर चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी
छात्रों और अभिभावकों ने स्पष्ट किया कि प्रशासन ने इतना बड़ा फैसला लेने से पहले उनसे कोई संवाद स्थापित नहीं किया। ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई है कि संविलयन की इस प्रक्रिया को तुरंत प्रभाव से रोका जाए और विद्यालय के मूल स्वायत्त स्वरूप को अक्षुण्ण रखा जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार और संबंधित विभाग ने इस फैसले को वापस नहीं लिया, तो आंदोलन को और अधिक तीव्र करते हुए चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।




