भोपाल/ टीकमगढ़। महिला एवं बाल विकास विभाग में भ्रष्टाचार, पदीय दायित्वों में लापरवाही और स्वेच्छाचारिता बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ शासन ने कड़ा रुख अपनाया है। आयुक्त महिला एवं बाल विकास, मध्य प्रदेश निधि निवेदिता ने टीकमगढ़ जिले की बाल विकास परियोजना बल्देवगढ़ के परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) महेश दोहरे को पदीय कर्तव्यों में घोर लापरवाही, नियमों को ताक पर रखकर बैकडोर से अवैध नियुक्ति करने तथा शिकायतकर्ता को धमकाने के गंभीर आरोपों में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय संभागीय संयुक्त संचालक महिला एवं बाल विकास, सागर संभाग निर्धारित किया गया है।
इन चार गंभीर आरोपों पर हुई सख्त कार्रवाई
1. बिना सार्वजनिक सूचना गोपनीय तरीके से चहेती को दी नियुक्ति
कलेक्टर टीकमगढ़ की जांच रिपोर्ट के अनुसार, परियोजना अधिकारी महेश दोहरे ने फरवरी 2026 में सुश्री वंशीता दीक्षित को निर्धारित मानदेय पर अवैध व नियमविरुद्ध तरीके से अस्थाई नियुक्ति प्रदान की। इसके लिए ग्राम स्तर पर कोई सार्वजनिक सूचना जारी नहीं की गई और योग्य आवेदकों को अवसर से वंचित कर गोपनीय तरीके से निजी लाभ पहुंचाने की मंशा से नियुक्ति की गई।
2. सीएम हेल्पलाइन के शिकायतकर्ता को दी धमकी, वीडियो हुआ था वायरल
एसडीएम बल्देवगढ़ द्वारा प्रेषित प्रतिवेदन के अनुसार, सोशल मीडिया पर परियोजना अधिकारी का एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ था। जिसमें वे जमुनिया खिरक (चक्रमाधौसिंह) केंद्र की कार्यकर्ता के खिलाफ सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराने वाले शिकायतकर्ता अशोक पर शिकायत वापस लेने का अनुचित दबाव बना रहे थे। वीडियो में अधिकारी खुलेआम कहते नजर आए— "आप कुछ भी कर लो कार्यकर्ता नहीं हटेगी, पूरा गांव लग जाए फिर भी कार्यकर्ता नहीं हटेगी।" जांच में प्रथम दृष्टया अधिकारी का आचरण पदीय मर्यादा के पूर्णतः विपरीत और अशोभनीय पाया गया।
3. निरीक्षण लक्ष्य में भारी कमी, कारण बताओ नोटिस का नहीं दिया जवाब
संभागीय संयुक्त संचालक सागर संभाग द्वारा जारी नोटिस का भी अधिकारी ने कोई जवाब नहीं दिया। नियमानुसार माह में कम से कम 12 दिवस भ्रमण कर 24 आंगनबाड़ी केंद्रों का विस्तृत निरीक्षण अनिवार्य था, लेकिन अप्रैल और मई 2026 में 48 के लक्ष्य के विरुद्ध मात्र 17 निरीक्षण (महज 35%) ही किए गए।
4. जिला कार्यक्रम अधिकारी के निर्देशों की अवहेलना
जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ) टीकमगढ़ द्वारा अप्रैल 2026 में परियोजना कार्यालय के निरीक्षण के दौरान कई गंभीर कमियां पाई गई थीं। 10 दिनों के भीतर पालन प्रतिवेदन (कंप्लायंस रिपोर्ट) प्रस्तुत करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी अधिकारी द्वारा प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं किया गया।
आयुक्त के आदेश में सख्त टिप्पणी:
आयुक्त निधि निवेदिता द्वारा जारी आदेश (क्रमांक 1885) में उल्लेख किया गया है कि परियोजना अधिकारी द्वारा शासकीय कार्य निर्वहन में घोर लापरवाही, स्वेच्छाचारिता और शासन के नियमों के विपरीत कार्य किया जा रहा था। जिससे विभाग की छवि धूमिल हुई और पात्र हितग्राही योजनाओं के लाभ से वंचित रहे। लोक सेवक द्वारा शिकायतकर्ता को खुलेआम धमकी दिया जाना अत्यंत अशोभनीय कृत्य है।
अतः म.प्र. सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम-1966 के नियम-9 के तहत उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।




