दमोह। दमोह के नवागत कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने बुधवार सुबह 10 बजे जिला अस्पताल के दवा स्टोर रूम एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालय का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान एक्सपायरी दवाएं, बंद पड़े फ्रीजर, दवा वितरण में गंभीर देरी और कर्मचारियों की अनुपस्थिति जैसी बड़ी लापरवाहियां उजागर हुईं।
औचक निरीक्षण में खुलीं पोल
स्टोर रूम में कई दवाएं एक्सपायर हो चुकी थीं और कई ऐसे फ्रीजर बंद पाए गए, जिनमें जरूरी दवाएं रखी थीं। स्टॉक रजिस्टर और भौतिक जांच के दौरान 6 दवाओं/सामग्रियों की संख्या में विसंगति मिली। वर्ष 2025 के 3 और वर्ष 2026 के 39 डिमांड पत्र लंबे समय से लंबित पड़े थे। कलेक्टर ने कहा कि दवाओं की आपूर्ति 24 घंटे में होनी चाहिए, लेकिन लापरवाही के कारण ग्रामीण अस्पतालों तक दवाएं नहीं पहुंच पा रही थीं और मरीजों को बाहर से दवाएं खरीदनी पड़ रही थीं।
स्टोर रूम के दो कर्मचारियों को तत्काल निलंबित करने के आदेश दिए गए। CMHO कार्यालय के निरीक्षण के दौरान अनुपस्थित पाए गए 16 अधिकारियों व कर्मचारियों का 3 दिन का वेतन काटने के निर्देश दिए गए।
गर्भवती महिला व नवजात की मौत के आरोप पर जांच
निरीक्षण के दौरान पुष्पेंद्र राठौर नामक युवक ने कलेक्टर से शिकायत की कि डॉक्टर और नर्सों की लापरवाही से उसकी पत्नी के प्रसव के बाद नवजात शिशु की मौत हो गई। कलेक्टर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सिविल सर्जन को तत्काल निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए।
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और वह जल्द ही पुनः औचक निरीक्षण करेंगे।




