खरगोन। खरगोन की प्रसिद्ध 40 साल पुरानी जवाहरलाल नेहरू सहकारी सूत मिल की नीलामी प्रक्रिया शुरू हो गई है। वैश्विक मंदी और लगातार घाटे के कारण बंद हुई इस मिल पर नेशनल को-ऑपरेटिव डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (NCDC) का ब्याज सहित लगभग 24.16 करोड़ रुपये का बकाया है, जिसकी वसूली के लिए 23 सितंबर को नीलामी तय की गई है।
आर्थिक संकट और नीलामी के मुख्य बिंदु
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, नाबार्ड और एनसीडीसी का मिल पर भारी बकाया है। 25 अगस्त 2025 को एनसीडीसी ने मिल का कब्जा लिया था। 16 जुलाई 2026 तक एनसीडीसी की बकाया राशि बढ़कर 24 करोड़ 16 लाख 39 हजार 17 रुपये हो गई है। सूत मिल 19.25 एकड़ जमीन में फैली हुई है, जिसमें जमीन, बिल्डिंग और मशीनरी शामिल हैं। एनसीडीसी ने इसे दो भागों में नीलाम करने का निर्णय लिया है:
पहला भाग: रिजर्व प्राइस ₹4.25 करोड़
दूसरा भाग: रिजर्व प्राइस ₹3.83 करोड़
कर्मचारियों का संकट: दिसंबर 2025 में मिल बंद होने से 500 से अधिक कर्मचारी बेरोजगार हो गए। लेबर कोर्ट के माध्यम से मजदूर करीब ₹1 करोड़ के बकाया वेतन, ग्रेच्युटी और बोनस की मांग कर रहे हैं। साथ ही अंशधारियों (शेयरधारकों) का पैसा भी फंसा हुआ है।
मिल का प्रबंधन और इतिहास
मिल का संचालन 'जवाहरलाल नेहरू सहकारी एग्रीकल्चर प्रोड्यूज प्रोसेसिंग सोसायटी लिमिटेड खरगोन' द्वारा किया जाता है। इस सोसाइटी के संस्थापक अध्यक्ष सहकारिता नेता दिवंगत सुभाष यादव थे। उनके बाद उनकी पत्नी दमयंती यादव चेयरपर्सन बनीं। वर्तमान में पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री अरुण यादव इसके चेयरमैन हैं।
मिल के प्रबंध निदेशक दीपक कट्टी और एनसीडीसी की क्षेत्रीय निदेशक इंद्रजीत कौर ने नीलामी प्रक्रिया की आधिकारिक पुष्टि कर दी है।




